उत्तम संयम धर्म का मार्ग बताया
खतौली (मुजफ्फरनगर)। शांतिनाथ जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व की आराधना करते हुए श्रद्धालुओं ने चक्रवती राजा के ऐश्वर्य एवं वैराग्य पर भावपूर्ण नाटिका की सुंदर प्रस्तुति की गई।
पीसनोपाड़ा मंदिर में एटा से पधारे पंडित जी ने जिनवाणी के मर्म को समझाया। धर्मसभा में अंतसमती व आमर्षमती माता जी ने बताया आज हमें उत्तम संयम धर्म की आराधना करते हुए जीवन को धर्म मार्ग पर आगे बढ़ाना है। संयम जीवन का सार तत्व है। संयम या सदाचार रहित जीवन निरर्थक है। नीरज जैन बंटी, सोनी जैन व नोनू जैन ने अपने मित्रों में जीवंत भूमिका करके श्रद्धालुओं की प्रशंसा प्राप्त की। इस अवसर पर मंदिर में काफी भीड़ रही। जैन मंडी मंदिर में भक्ति नृत्य व भगवान महावीर की शिक्षाओं पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। भागीरथी मंदिर में डॉ. ज्योति जैन के संचालन में धार्मिक प्रश्न मंच आयोजित कराया गया।
मौके पर संजय मुखिया, भूषणलाल, विकास, हंस कुमार, पीयूष टीकरी, सिद्धांत जैन, रवि, पल्लव जैन, अनिल, अशोक तिगाई, आलोक, अजय, शिखर चंद, राजेश जैन, धनप्रकाश, सतीश सर्राफ, बोबी, पवन महलका, धनेश, सुनील तिगाई, अंचित, राजीव, पतेंद्र, संदीप, बल्लू सर्राफ, सुरेंद्र, नवीन जानसठ, दीपक भैंसी, अरुण औषधि, मनोज, अरुण नंगली, राकेश अंबर, पवन, सुरेश, मीनाक्षी, डोली, शोभा, अनीता आदि श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।