ताश के पत्ते की तरह बिखर गए डिब्बे
खतौली (मुजफ्फरनगर)। चाय की दुकान करने वाला हरि सैनी ने उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसे का मंजर खुद अपनी आंखों से देखा। हरि के मुताबिक पलक झपकते ही ट्रेन के डिब्बे ताश के पत्ते की तरह बिखर गए। बैंच पर बैठे चाय पी रहे पांच ग्राहक जान बचाकर दुकान में घुस गए थे। करीब आधा घंटे तक हरि आंखें बंदकर दुकान में ही बैठा रहा। दुकान में घुसे पांचों ग्राहक घायल हो गए थे। घर से नंगे पैर दौड़ी उसकी मां जगवीरी ट्रेन हादसा देखकर बेहोश हो गई थी।
जगत कॉलोनी निवासी हरि सैनी पुत्र रामदास चौधरी तिलकराम इंटर कॉलेज की दुकान में चाय की दुकान करता है। हरि सैनी ने हादसे के दस दिन बाद सोमवार को अपनी दुकान खोली। हरि सैनी ने बताया 19 अगस्त को वह अपनी दुकान पर कढ़ाई में पकौड़ी बना रहा था। दुकान के बाहर पड़ी बैंच पर ग्राहक बैठे चाय पी रहे थे। शाम करीब 5:40 बजे तेज धड़धड़ की आवाज सुनकर उसने रेलवे ट्रैक की ओर देखा। ट्रैक से कोच उतरने लगे थे, देखते ही देखते ट्रेन के कोच ताश के पत्ते की तरह बिखरते चले गए। कोच पलटते हुए दुकान की ओर आने लगे। शोर मचाने पर ग्राहकों में अफरातफरी मची गई और कुछ ग्राहक दुकान से भाग निकले, जबकि पांच ग्राहक जान बचाकर दुकान में घुस गए। इतने में कोच आकर दुकान और स्कूल की दीवार से टकराए।
एक बार तो ऐसा लगा कि अब जान नहीं बचेगी। हरि ने बताया कि वह तो दुकान में आंखें बंद करके आधा घंटे तक बैठा रहा। जबकि दुकान के अंदर घुसे ग्राहकों की चीख निकल गई। हादसे की जानकारी मिलने पर हरि की मां घर में काम करते हुए बेटे को देखने के लिए नंगे पैर ही भाग निकली थी। ट्रेन हादसा देखकर वह बेहोश हो गई। आधे घंटे बाद बमुश्किल हरि और ग्राहक कोचों के बीच की जगह से बाहर निकले। दुकान में घुसे गंगा सैनी का कान कट गया था। भूड़ निवासी सईद कढ़ाई के तेल से झुलस गया था। गांव लिसौड़ा निवासी मनोज, गांव तिगाई निवासी मोहन भी घायल हो गया। इन दोनों की साइकिल कोच के नीचे दब गई थी।