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काव्य गोष्ठी का आयोजन

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...जहां संस्कार, चरित्र बन गए हैं इतिहास के पन्ने
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खतौली (मुजफ्फरनगर)।
उदीयमान साहित्यिक मंच की ओर से काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को बांधे रखा। कवि अजय जनमेजय ने सुनाया कि चलचित्र बन गए हैं, जहां संस्कार चरित्र बन गए हैं इतिहास के पन्ने।
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पंडित अखिलेश साहिल के निवास पर आयोजित काव्य गोष्ठी का शुभारंभ अनिल रितुरात ने सरस्वती वंदना से किया। अध्यक्षता समाजसेवी जसवीर राणा ने की। उन्होंने कहा कि चिराग जहां भी रोशन होता है, धधकते अंधकार को भी मिटा देता है। कवि चिराग सिंघल नवीन ने कविता पढ़ी-नीलामी जो करते फिरते ऊंची-ऊंची बोली से, वो केवल समझ सकते हैं बंदूकों की गोली से। अनिल रितुराज का गीत-प्रथम मिलन वो सूनापन, भूल नहीं पता तुमको मन। तुम जो कहते मैं सब सुनता, पलकों पे सपने नित बुनता। पंडित अखिलेश साहिल का गीत-चांद, तारे, कली, पुष्प, फल, ये अनल, ओस, सागर का जल। तेरे अंधेरों की वो लालिमा, तेरी आंखों के खिलते कवल। मनीष चौधरी की कविता पढ़ी-इधर देखा इधर मुश्किल, उधर देखा उधर मुश्किल। जब पड़ी मुश्किल पर मुश्किल, मुश्किल हो गई और मुश्किल। अजय जनमेजय ने कविता पढ़ी-चलचित्र बन गए हैं, जहां संस्कार, चरित्र बन गए हैं इतिहास के पन्ने। इनके अलावा मनीष चौधरी, अमित शर्मा, पुष्पेंद्र बावरा, तेजपाल शर्मा, कृष्ण भसीन, कालूराम त्यागी, अजय अरोरा आदि ने भी काव्यपाठ किया। संचालन अमित शर्मा ने किया।
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