मोरना। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि परमात्मा ने आत्मकल्याण के लिए मानव जीवन दिया है। प्रभु से सांसारिक सुख नहीं, बल्कि सद्गुणों की प्रार्थना करें।
शुक्रताल में भागवत पीठ शुकदेव आश्रम स्थित डोंगरे भवन में कथा व्यास आचार्य नरेंद्र शर्मा की कथा का शुभारंभ स्वामी ओमानंद सरस्वती ने किया। रतलाम, मध्यप्रदेश से आए भक्तों ने विधि-विधान से भागवत पूजन किया। स्वामी ने कहा कि मानव जीवन दुर्लभ है। भागवत शिक्षा देती है कि परमात्मा से सुख नहीं, बल्कि सद्गुणों का फल मांगना चाहिए। सदगुणों से ही जीवन का आत्मकल्याण होता है। प्रभु से सत्कर्म, शुभकर्म करने का गुण मांगे, भक्ति और परमार्थ का गुण मांगे एवं विवेक देने की प्रार्थना करें, ताकि संमार्ग पर चलकर लोक कल्याण का कार्य करते रहे। संपत्ति से संपन्न होना तो सरल है, मगर सदगुणों से संपन्न होना उतना ही कठिन है। कथाव्यास आचार्य नरेंद्र शर्मा ने कहा कि भागवत कथा मोक्षदायिनी है। यज्ञमान राजेश परिवार ने संतों और पुरोहितों का पूजन किया। अचल कृष्ण शास्त्री, सुमन शास्त्री, श्याम, हषमणि, शैलेष चौरसिया, राजू, विजय शर्मा आदि मौजूद रहे।