दहशत के बीच यात्रियों ने शुरू किया सफर
मुजफ्फरनगर/खतौली। उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद यात्रियों में इस कदर खौफ छा कर गया है कि पटरियों की आवाज से भी रौंगटे खड़े हो रहे हैं। हादसे के 31 घंटे बाद जब यहां से ट्रेन गुजरी तो प्रत्येक यात्रियों की आंखों में खौफ नजर आया। खासकर महिलाओं और बच्चों में हादसे का डर ज्यादा है। कई यात्रियों ने कहा कि दोषियों को सजा मिलेगी और कुछ दिन बाद वह जेल से बाहर आ जाएंगे। उन लोगों का क्या होगा, जिनके घरों के चिराग बुझे और अपनों को खो दिया। उसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता।
देहरादून एक्सप्रेस ट्रेन खतौली में रेलवे स्टेशन पर आकर रुकती है। स्टेशन पर कुछ यात्री अपने-अपने कोच से बाहर निकले और हादसे के बारे में जानने लगते हैं। यहां मध्यप्रदेश के रहने वाले गोपाल और सतनाम ने बताया कि खतौली में ट्रेन हादसे की खबर पता चली। भयभीत तो जरूर हैं, लेकिन वे अपने घर से पूजा-पाठ करके चले थे। वह परिवार के साथ हरिद्वार में गंगास्नान करने जा रहे हैं। मेरठ के ब्रह्मपुरी निवासी राजीव रस्तोगी ने कहा कि वह सहारनपुर में सराफा की दुकान पर काम करता है। प्रतिदिन ट्रेन से आता-जाता है। ट्रेन हादसा होना सुनकर वह भी भयभीत है। उसके बाद देहरादून एक्सप्रेस ट्रेन मुजफ्फरनगर के लिए बढ़ती है। कोच में प्रत्येक यात्री दहशत में नजर आया। हादसे वाली जगह से ट्रेन धीमी गति से गुजरी तो यात्रियों ने भयावह मंजर के निशानों को अपने मोबाइलों में कैद किया। जैसे ही ट्रेन आगे की ओर बढ़ी और रफ्तार तेज हुई तो सहम उठे। हादसे के बाद से अन्य रेल यात्रियों में खौफ बैठ गया है। रफ्तार के कारण पटरियों पर पहियों की आवाज हल्की सी तेज होने पर यात्री सहम जाते और एक-दूसरे को देखने लगते हैं। कोई खिड़की से झांककर देखता तो कोई हादसे की भयावहता को लेकर रेलवे को कोसता नजर आया। दहशत में कैद यात्रियों की आंखें अपनों पर ही टिकी रही। महिलाएं और बच्चों में हादसे का अधिक खौफ तारी दिखा। हर कोई भगवान का नाम लेकर सफर पूरा करता नजर आया। यात्रियों से रेलवे की सुविधाओं के बारे में पूछे बाने पर बोले, हादसा बड़ी चूक की गवाही दे रहा है। दोषियों को सजा मिलेगी और कुछ दिन बाद वह जेल से बाहर आ जाएंगे। उन लोगों का क्या होगा, जिनके घरों के चिराग बुझे और अपनों को खो दिया। उसकी भरपाई दुनिया की चीज नहीं कर सकेगी।