मोरना। भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत से मानव जीवन के लक्ष्य की पहचान होती है। ईष्ट तत्वों की प्राप्ति भागवत से होती है। प्राणिमात्र के लिए भागवत अमृत तत्व हैं।
श्री शुकदेव आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ करते हुए स्वामी ओमानंद ने कहा कि भागवत सही सुनने, देखने और बोलने की शक्ति देती है। जीवन के नकारात्मक विचार सकारात्मक बनते है। ईष्ट तत्वों की प्राप्ति कैसे हो, यह भागवत बताती है। इस नश्वर संसार में न तो कुछ सार है और न ही असार हैं, जो जिस योग्य होता हैं, उसे उसकी योग्यता के अनुरूप प्राप्तियां हो जाती है। जो प्राप्त होना होता है, वह हो जाता है और जो छूटना होता है, छूट जाता है। इसलिए निर्लिप्त भाव से सहज होकर जीवन का आनंदोत्सव मनाए। जीवन अपनी गति से चलता हैं, सहज होकर इसके मार्ग को देखिए। सहजता ही वह मार्ग है, जो हमें परम शक्ति का दर्शन कराता है। स्वामी ने कहा कि अहंकार प्रबल शत्रु है, जो वास्तविकता से दूर ले जाता हैं। वृंदावन से आए कथा व्यास गोपीचंद्र व्यास ने कहा कि भागवत मोक्षदायिनी हैं। कथा श्रवण मात्र से मनुष्य के जीवन का कल्याण करती है। राजस्थान के धौलपुर के मुख्य यजमान दाऊ दयाल तोमर ने पूजा अर्चना की। संत दामोदर दास जी महाराज, अंचल शास्त्री, सुमन शास्त्री, श्याम आदि मौजूद रहे। भागवत पीठ में दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश और कोल्हापुर महाराष्ट्र की भागवत कथा प्रारंभ हुई।