जिला प्रशासन ने आंदोलनरत लेखपालों पर नकेल कस दी है। सदर तहसील के 24 लेखपालों को सेवा समाप्ति करने का नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। 12 लेखपालों को निलंबित कर दिया गया। अब तक प्रशासन की ओर से चारों तहसीलों में 63 लेखपालों के खिलाफ सेवा समाप्ति और 44 के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है। जल्द बड़ी कार्रवाई करने की भी प्रशासन तैयारी कर रहा है। उधर, आंदोलनकारी लेखपाल झुकने को तैयार नहीं हैं। मांगों के समर्थन में कचहरी में लेखपालों का धरना-प्रदर्शन जारी रहा।
जिले में लेखपालों के आंदोलन से राजस्व के कार्य प्रभावित हो गए हैं। छात्रों के आय-जाति के प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहे हैं। किसानों के जमीन संबंधी सभी कार्य लटक गए हैं। तीन जुलाई से लेखपालों की लगातार हड़ताल चल रही है। वेतन वृद्धि सहित विभिन्न मांगे लेखपालों की हैं।
जिला प्रशासन के मौखिक रूप से कहने और नोटिस जारी करने के बाद भी लेखपाल आंदोलन की राह पर हैं। जानसठ, खतौली और बुढ़ाना तहसील में लेखपालों पर सेवा समाप्ति और निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है। सदर तहसील में एसडीएम कु़मार धर्मेंद्र के अवकाश पर होने के कारण कार्रवाई नहीं हो पाई थी।
सोमवार को एसडीएम ने कड़ी कार्रवाई करते हुए आंदोलन में शामिल 24 लेखपालों को सेवा समाप्ति का नोटिस जारी कर दिया है। इसमें वे लेखपाल शामिल है, जिनकी नियुक्ति को दो साल पूरे नहीं हुए हैं। इसी के साथ 12 लेखपालों का निलंबित कर दिया है। निलंबित लेखपालों में तेजवीर सिंह, शैलेंद्र कुमार शर्मा, अनिल वर्मा, श्रीचंद सैनी, सचिन बालियान, आसिफ रउरहमान, हरिकृष्ण, सोमनाथ, प्रवेश कुमार, रवेंद्र कुमार, ओमवीर सिंह, मंगेश वालिया शामिल हैं।
एसडीएम के मुताबिक लेखपाल कमल किशोर, फहीम, तरुण कुमार, केशव शर्मा, मेधा शर्मा, राहुल शर्मा, प्रशांत गुप्ता, मोनिका शर्मा, सोनिया, हुस्नकमाल, अमित सैनी, मनोज कुमार, रणधीर सिंह, रवि चक्रवर्ती, नसीम, गौरव कुमार, सौरभ सिंह, प्रशांत चौरसिया, शांतनु कौशिक, मोनू सैनी, बसंत कुमार, मनेाज कुमार, दीपक कुमार, संदीप कुमार को सेवा समाप्ति का नोटिस दिया गया है।
लेखपालों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई का आंदोलन पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। लेखपालों ने अपने आंदोलन की धार तेज कर दी है। अपनी मांगों को लेकर कलक्ट्रेट में धरना देकर प्रदर्शन किया। जिलेभर के लेखपाल आंदोलन में शामिल रहे। लेखपालों ने कहा कि वह किसी भी तरह से पीछे हटने वाले नहीं है। सरकार जेल भेजेगी तो जेल जाने को तैयार है। यह लड़ाई आर-पार लड़ी जाएगी।