खतौली। खतौली डिपो ने सरकार को फरवरी में माह 6.11 लाख रुपये का मुनाफा कमाकर दिया है। यह संभव हरिद्वार और ऋषिकेश मार्ग की 24 बसों का संचालन बंद करने तथा उनको दूसरे रूटों पर चलाने से हो सका है। 1.22 करोड़ का घाटा पूरा करते हुए डिपो अब मुनाफा कमाने की ओर बढ़ चला है।
रोडवेज परिवहन विभाग की लिस्ट में खतौली डिपो घाटे के नाम पर हमेशा नंबर वन पर रहा है। यही वजह थी कि पिछले वर्ष डिपो का निरीक्षण करने पहुंचे प्रदेश सरकार के परिवहन राज्यमंत्री स्वतंत्र देव ने इस डिपो को बंद करने तक की बात कह डाली थी। मंत्री के निरीक्षण के दौरान डिपो 1.22 करोड़ प्रतिवर्ष घाटे से चल रही थी। इसके बाद प्रमुख सचिव परिवहन आराधना शुक्ला ने एक फरवरी को डिपो का निरीक्षण किया था। प्रमुख सचिव को निरीक्षण के दौरान काफी खामियां मिली थीं। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों तक को फटकार लगाई थी और आगे से कामकाज में सुधार करने के आवश्यक दिशा निर्देश दिए थे। इसके बाद से अधिकारियों ने डिपो की आमदनी बढ़ाने के भरसक प्रयास प्रारंभ कर दिए थे। डिपो से 74 बसों का संचालन होता है, जिनमें से 70 बस निगम की और चार बस अनुबंधित हैं। पिछले वर्ष दिसंबर में एआरएम रणजीत सिंह ने खतौली से हरिद्वार व ऋषिकेश मार्ग पर चलने वाली 24 बसों का संचालन बंद कर दिया। इन बसों को खतौली से मेरठ, मेरठ से शामली, खतौली से बुढ़ाना, कांधला, कैराना तथा खतौली से बुढ़ाना, शामली और बिड़ौली रूट पर संचालन शुरू कराया था। एआरएम के मुताबिक डिपो को माह जनवरी में 51 हजार रुपये का मुनाफा हुआ था और फरवरी में मुनाफा बढ़कर 6.11 लाख रुपये हो गया है। अब डिपो 1.22 करोड़ का घाटा पूरा करते हुए मुनाफा की ओर बढ़ने लगी है। खतौली डिपो की 24 बसों का संचालन बंद करने और उनको दूसरे मार्गों पर लगाने से मुनाफा हुआ है। डिपो को परिवहन की ओर से नई बसें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। पुरानी बसों को ही चलाया जा रहा है। संभावना है कि इस वर्ष डिपो को एक करोड़ रुपये का मुनाफा होगा।
डिपो में 40 चालक और परिचालकों की कमी
एआरएम रणजीत सिंह के मुताबिक डिपो में 40 चालक और परिचालक की कमी है। 70 बसों के संचालन के लिए फिलहाल मौजूद चालक व परिचालक से ही दो-दो दिन तक काम लिया जा रहा है। स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए अधिकारियों को कई बार लिखकर भी भेजा जा चुका है। इसके बावजूद स्टाफ की कमी पूरी नहीं हो सकी है।