शहर की सड़कों पर जुगाड़ वाहन जितना जाम के लिए जिम्मेदार है, उससे अधिक आबोहवा के लिए नुकसानदायक हैं। जुगाड़ सवारी शहर पर भारी है। बाइक, स्कूटरों को काटकर धड़ल्ले से जुगाड़ वाहन तैयार किए जा रहे हैं, जो मालभाड़े में खूब प्रयोग हो रहे हैं। इन्हें रोकने के लिए एआरटीओ से लेकर प्रशासन भी खामोश है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 10 पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के संचालन पर पाबंदी लगाई है। पुराने वाहन चालकों ने इसका भी तोड़ ढूंढ निकाला। कबाड़ में कटने वाले वाहनों को अपने हिसाब से मॉडीफाई किया जा रहा है। पुरानी बाइक, स्कूटर को काटकर रेहड़ों, रिक्शों के साथ माल वाहन तैयार हो रहेे हैं। जो शहर में जाम के साथ आबोहवा को भी जहरीला कर रहे हैं। इन वाहनों पर एआरटीओ से लेकर यातायात पुलिस भी आंखें मूंद हुए हैं। इन जुगाड़ वाहनों से खतरनाक जहरीला धुआं निकलता है, जो प्रदूषण का मुख्य कारण है। एआरटीओ राजीव कुमार बंसल ने बताया कि किसी भी पुराने वाहन को काटकर उसका नए सिरे से परिवर्तित करने का नियम नहीं है। नियम विरुद्ध दौड़ रहे वाहनों पर कार्रवाई की जा रही है। जुगाड़ वाहनों को भी पकड़कर सीज किया जाएगा।
अधूरे काम पर पीठ थपथपा रहे अफसर
मुजफ्फरनगर। ई-रिक्शा पर कार्रवाई कर अफसर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, जबकि शहर में बड़ी संख्या में जुगाड़ वाहन चल रहे हैं। इन्हें सीज करने या कार्रवाई करने में विभागीय अधिकारी एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ रहे हैं। ई-रिक्शा जनपद भर में 10 हजार से अधिक है। मगर, एआरटीओ विभाग में 1600 से अधिक ही पंजीकृत है। बाकी अपंजीकृत दौड़ रहे हैं।