फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लेफ्टिनेंट बनी भाग्यश्री

विज्ञापन
विज्ञापन
लेफ्टिनेंट बनी भाग्यश्री
विज्ञापन

मुजफ्फरनगर। पति कर्नल विश्वास कुमार की मृत्यु के बाद उनकी वर्दी को खूंटी पर नहीं लटकने देने का प्रण करने वाली भाग्यश्री ने अपनी मेहनत और लगने से अपने संकल्प को पूरा कर दिखाया। वह शनिवार को चेन्नई के आफिसर ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) में हुई पासिंग परेड के बाद लेफ्टिनेंट बन गई। पहली पोस्टिंग ऑडिनेस कोर सिकंदराबाद में मिली। ससुर सूबेदार वीरेंद्र कुमार, सास ओमवती ने पुत्रवधू भाग्यश्री को बैच और रैंक लगाए तो वह भावुक हो गई। पासिंग परेड के मुख्य अतिथि नॉदर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जरनल रणवीर सिंह ने भी उनका उत्साहवर्धन किया। इस दौरान भाग्यश्री का सात साल का बेटा विवान और रिश्तेदार कर्नल ओमप्रकाश भी मौजूद रहे।
शहर के गांधीनगर निवासी सूबेदार वीरेंद्र कुमार के बड़े बेटे विश्वास कुमार 12 जून 1999 को आईएमए देहरादून से लेफ्टिनेंट बने थे। कर्नल बनने के बाद उनकी तैनाती चेन्नई में हुई। उस वक्त परिवार में पत्नी भाग्यश्री और छह साल का बेटा विवान था। 11 अक्तूबर 2017 को सेना ग्राउंड पर दौड़ लगाते हुए ह्दयाघात से कर्नल विश्वास कुमार की मृत्यु हो गई थी। श्रद्धांजलि यज्ञ में उनकी पत्नी भाग्यश्री ने कर्नल विश्वास कुमार की वर्दी को हैंगर में नहीं लटकने दूंगे का संकल्प लिया था। 10 दिसंबर 2017को एसएसबी (सर्विस सेलेक्शन बोर्ड) का एग्जाम पास किया। 31 मार्च 2018 को चेन्नई के ओटीए में उनकी ट्रेनिंग प्रारंभ हुई थी। सूबेदार विरेंद्र कुमार ने बताया कि बेटे की मौत के बाद बहू भाग्यश्री ने सेना ज्वांइन करने का लक्ष्य बना लिया था। कर्नल ओमप्रकाश ने बताया कि 16 मार्च को भाग्यश्री मुजफ्फरनगर आएगी।
विज्ञापन

बेटे को भी आर्मी आफिसर बनाऊंगी
मुजफ्फरनगर। लेफ्टिनेंट बनी भाग्यश्री ने अमर उजाला को बताया कि पति विश्वास कुमार की प्रेरणा से उन्हें यह वर्दी मिली। ससुर और पति सेना में रहे। भारतीय सेना ज्वाइंन कर देश सेवा करने की परिवार की परंपरा को मैंने निभाया है। बेटे विवान को भी एनडीए में आर्मी ऑफिसर बनाने का संकल्प लिया है। वे कहती हैं कि विश्वास के चले जाने के बाद वो कठिन समय था, ऐसे में विश्वास की वर्दी देख कर आर्मी ज्वाइंन करने का प्रण लिया। परिवार का पूरा सहयोग मिला। ट्रेनिंग के दौरान अफसरों ने भी लगातार हौसला अफजाई की। ट्रेनिंग के दौरान बेटे विवान को साथ रख कर मां का फर्ज भी पूरा किया।
विज्ञापन

सफल पायलट बनना चाहती थी
मुजफ्फरनगर। भाग्यश्री सफल पायलट बनना चाहती थी। आकाश में उड़ना उनका शौक रहा। वह एनसीसी में राष्ट्रपति अवार्ड पा चुकी है। उन्होंने यूएसए से पायलट का कोर्स भी किया था। मगर पति की मौत के बाद उन्होंने सेना में जाने का संकल्प लिया। वे बताती है कि ट्रेनिंग काफी कठिन रही, मगर लगन और मेहनत से वे देश की सेवा के लिए आर्मी ऑफिसर बनी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें