बदमाशों का शोर मचाकर जमा की थी भीड़
मुजफ्फरनगर। 27 अगस्त 2013 को शाहनवाज की मौत के बाद सचिन और गौरव ने मौके से भागने की कोशिश की थी, लेकिन वह गलियों में भटक गए थे। पीछा कर रहे लोगों ने बदमाशों का शोर मचाकर भीड़ जमा कर ली और उसके सामने दोनों बेबस हो गए। चौराहे पर दोनों की नृशंस तरीके से हत्या कर दी गई। घटनास्थल के आसपास के लोग इस पूरी घटना के चश्मदीद हैं, लेकिन खुलकर कुछ नहीं बोलते। नाम छिपाने की शर्त पर एक बुजुर्ग बताते हैं कि गौरव की साइकिल शाहनवाज से टकरा गई थी। इसे लेकर दोनों में कहासुनी हो गई। वह बताते हैं कि बाद में गौरव और सचिन तीन अन्य लोगों के साथ दो बाइक से आए। बाइक घटना से दूर खड़ी कर दी गई। उन्होंने शाहनवाज से मारपीट की तो लोगों ने उन्हें घेर लिया। इस दौरान तीन लोग तो भाग निकले, जबकि सचिन और गौरव तालाब की ओर चले गए। आगे रास्ता बंद देखकर दोनों लौट आए। उनके पीछे भाग रहे लोग बदमाश का शोर मचा रहे थे। यह सुनकर भारी भीड़ जुट गई। दोनों को चौराहे पर घेर लिया गया। भीड़ के आगे बेबस दोनों भाइयों की हत्या कर दी गई।
समझदारी से काम लेते तो न होती घटना
मुजफ्फरनगर। कवाल के ग्रामीण गौरव और सचिन की हत्या का मलाल करते हैं। वह कहते हैं कि छोटा सा विवाद था, लेकिन गर्मजोशी में गलत कदम उठा लिए गए। साइकिल टकराने की घटना के बाद गौरव और सचिन के परिजन उन्हें समझा लेते या फिर शाहनवाज से मारपीट के बाद उसके परिजन समझदारी से काम लेते तो घटना इतनी बड़ी न होती।