चिलचिलाती गर्मी कम नहीं हो रही है। तापमान शिखर पर है। अमूमन पारा 40 से लेकर 43 के पार चल रहा है। ऐसे में उमस बढ़ने के साथ कई बीमारियां भी जन्म लेतीं है। इन बीमारियों से बचने के लिए संयम खानपान ही मुख्य उपचार है। हल्की लापरवाही भी सेहत बिगाड़ सकती है। गर्मी बढ़ने से अस्पताल में रोजाना करीब 800 मरीज सभी तरह के पहुंच रहे है। जिनमें सबसे अधिक गर्मी की बीमारियों से पीड़ित है।
बीते एक सप्ताह से गर्मी से जनमानस हाल बेहाल है। शनिवार को पारा 43 से पार था। रविवार को भी 41 के करीब रहा। हवाएं लू का रुप ले चुकी है, जो सेहत के लिए घातक है। इन दिनों लू, डायरिया, हैजा, फूट प्वाइजिंग, पेचिश, फीवर आदि बीमार फैर पसार रही है। साथ ही बढ़ती गर्मी में हीटस्ट्रोक, आंखों में जलन की खतरा भी बढ़ रहा है। इनसे बचने के लिए घरेलू कुछ उपचार कारगर है तो चिकित्सक की सलाह भी बीमारियों से दूर रख सकती है।
उल्टी-दस्त, फीवर के मरीज अधिक
जिला अस्पताल में इन दिनों सभी प्रकार के करीब 800 मरीज पहुंच रहे हैं। लेकिन, इनमें अकेले 250 से 300 मरीज गर्मी की बीमारी उल्टी-दस्त, फीवर से पीड़ित है। जिनका उपचार किया जा रहा है। इनके अलावा भी इंफेक्शन और डायरिया के मरीज पहुंच रहे है। मरीजों की संख्या बढ़ने से चिकित्सकीय स्टॉफ को अलर्ट किया गया है।
यह उपाय बीमारियों से बचाएगा
- ताजे फल, हरी सब्जियां और फलों का जूस पिएं।
- गर्मी में हमेशा ताजा भोजन करें, बासी भोजन से दूर रहे।
- हर 20 से 30 के अंतराल पर तरल पदार्थ पीए, खास तौर से स्वच्छ पानी।
- गर्मी के मौसम में ऐसे पदार्थ खाएं जिनमें ज्यादा फाइबर हो।
- हल्के एवं खुले कपड़े पहने। व्यायाम जरूर करे।
- नायरिल पानी, नींबू पानी का सेवन करे।
- घर से बाहर निकलें तो पूरी बाहों के कपड़े पहने।
इनसे बचे तो बेहतर
- कटे-फटे फलों को खाने से दूर रहे।
- तली-भुनी चीजों का प्रयोग बेहद कम करे।
- भारी भोजन न करे, जो पचने में समय ले।
- अधिक मसालेदार सब्जियां और फास्ट फूड से बचे।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक लोकेश गुप्ता ने बताया कि गर्मी में खान-पान का ध्यान रखना बेहद जरुरी है। मौसमी फल, ताजा भोजन और तरल पदार्थ अधिक प्रयोग करे। वैसे अस्पताल में उल्टी-दस्त और बुखार के मरीज अधिक बढ़े हैं। यह सब गर्मी की बीमारी से पीड़ित है।