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शांतिकुंज से जुड़ा था शिक्षाऋषि का वात्सल्य

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शांतिकुंज से जुड़ा था शिक्षाऋषि का वात्सल्य
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मुजफ्फरनगर। गायत्री मंत्र की महिमा को विश्व में व्यापक कर गए शांतिकुंज के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा की वीतराग स्वामी कल्याण देव के प्रति अगाध श्रद्धा थी। हरिद्वार के शांतिकुंज में देव संस्कृति विश्वविद्यालय का भूमि पूजन शिक्षा ऋषि ने किया था।
शिक्षा के क्षेत्र में स्वामी कल्याण देव की अमूल्य सेवाओं से प्रेरित पंडित श्रीराम शर्मा ने उन्हें सदैव अपरिग्रही सच्चा संत बताया था। गायत्री परिवार को स्वामी का अन्यय स्नेह, पितृवत वात्सल्य और संरक्षण मिला। वर्ष 2000 में शांतिकुंज में सृजन संकल्प विभूति महायज्ञ की पूर्णाहुति शिक्षाऋषि ने की थी। शांतिकुंज के अधिष्ठाता डॉ प्रणव पांडया और शैलदीदी कर्मयोगी संत के सानिध्य को कई बार शुकदेव आश्रम आए। संत स्मृति में डॉ पांडया ने कहा कि पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा कहते थे कि एक सच्चे साधु के दर्शन करने हैं, तो मुजफ्फरनगर और आसपास के जिलों में फैली उनकी शिक्षण संस्थाओं के विराट शरीर को देखकर आओ। शुक्रताल के जीर्णोद्धार में उनका पुरुषार्थ साधुवाद के काबिल है। उनकी निष्काम सेवा की तुलना किसी से नहीं की जा सकती है। शुकदेव के आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने बताया कि गुरुदेव का पंडित श्रीराम आचार्य से आत्मिक स्नेह था। मई 1999 में शांतिकुंज में महामंडलेश्वर सत्यमित्रानंद गिरि और अवधेशानंद गिरि की गरिमामयी उपस्थिति में वीतरात स्वामी कल्याण देव संस्कृति विश्वविद्यालय की नींव रखी थी। गायत्री मंत्र की वैदिक महत्ता को विश्व के सम्मुख प्रस्तुत करने में शांतिकुंज की अहम भूमिका है।
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गायत्री महायज्ञ की तैयारी पूरी, शुभारंभ आज
मुजफ्फरनगर। वीतराग स्वामी कल्याण देव द्वारा स्थापित गांधी पालीटेक्निक में शांतिकुंज हरिद्वार एवं गायत्री परिवार मुजफ्फरनगर के संयुक्त तत्वावधान में चार दिवसीय 108 कुंडीय श्रद्धासंर्वधन गायत्री महायज्ञ (बुधवार) से होगा। संयोजक रुकमणि भारद्वाज ने बताया कि प्रात: कलश यात्रा निकलेगी। सायंकाल पांच बजे स्वामी ओमानंद जी महाराज शुभारंभ करेंगे। डॉ चिन्मय पांडया का वैज्ञानिक अध्यात्मवाद पर उद्बोधन होगा। इस मौके पर साहित्य और धार्मिक पुस्तकों का मेला भी लगेगा। शांतिकुंज के कार्यकर्ता तैयारी में जुटे हैं। श्रद्धालु महायज्ञ में भागीदारी के लिए पहुंचने लगे हैं।
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