रतनपाल हत्याकांड: दो भाइयों समेत चार को उम्रकैद
मुजफ्फरनगर। मां के प्रेमी रतनपाल की हत्या करने वाले दो भाइयों समेत चार लोगों को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई है। रतनपाल हत्याकांड में 13 साल बाद अदालत का निर्णय आया।
दो अगस्त 2004 को जनकपुरी में बोरी में बंद एक युवक की गर्दन कटी लाश मिली थी, जिसका सिर गायब था। जनकपुरी के राजवीर की दुकान के पीछे यह लाश मिली थी। उसकी तहरीर पर सिविल लाइन पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया। बाद में मृतक की पहचान रामपुरी निवासी रतनपाल के रूप में परिजनों ने की थी। पुलिस ने जांच के उपरांत अजीत उर्फ अरुण, अमित पुत्रगण रामलाल वाल्मीकि निवासी रामपुरी, संजय कुमार पुत्र रामसिंह कश्यप निवासी रामपुरी और इंदरदास पुत्र बनारसी दास निवासी, ककराला थाना तीतरो जनपद सहारनपुर को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो सारा मामला खुल गया। इन लोगों की निशानदेही पर लाश का बाकी हिस्सा पर्दाफाश झील शामली रोड से बरामद किया गया। साथ ही आला कत्ल और लाश ले जाने वाला रेहड़ा भी बरामद किया गया।
अभियुक्त अजीत ने बताया कि रतनपाल उसकी मां का प्रेमी था। कई बार चेतावनी देने के बावजूद वह बाज नहीं आ रहा था, तब उसकी हत्या की साजिश रची। उसने एक अगस्त 2004 को रतनपाल को दावत के बहाने घर से बुलाकर अपने भाई और दो दोस्तों के साथ उसकी हत्या कर लाश को छुपा दिया था। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश भारद्वाज की अदालत संख्या 15 में हुई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कय्यूम अली चौधरी ने गवाह और सबूत कोर्ट में पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए शनिवार को अजीत उर्फ अरुण उसके भाई अमित दोनों दोस्तों संजय कुमार और इंदरदास को हत्या कर लाश छुपाने का दोषी करार देते हुए धारा 302/34 के तहत आजीवन कारावास और एक-एक हजार रुपये जुर्माना, धारा 201 के तहत पांच वर्ष का कारावास और 500-500 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। सजा सुनाने के बाद चारों को जेल भेज दिया गया।
कत्ल कर लाश के कर दिए थे टुकड़े
मुजफ्फरनगर। हत्यारोपियों ने रतनपाल की बड़ी बेरहमी से हत्या कर शव के कई टुकड़े कर दिए थे। आरी से रतनपाल की गर्दन काटकर मोतीझील में फेंक दी थी, जबकि धड़ के भी तीन टुकड़े कर उन्हें बोरी में भरा और रेहड़े में रखकर शव को जनकपुरी में फेंक दिया था।
मां की गवाही से मिली हत्यारों को सजा
मुजफ्फरनगर। अभियोजन पक्ष के अनुसार मुकदमे में कुल 13 गवाह थे, जिनमें मृतक का बहनोई प्रेम सिंह भी गवाह था। मगर कोर्ट में सुनवाई के दौरान बहनोई समेत अधिकांश गवाह पक्षद्रोही हो गए। मृतक की मां निर्मला देवी और पुलिस की गवाही ही सजा का आधार बनी। मां निर्मला देवी ने अपने बयान में बताया कि घटना के दिन अमित उसके बेटे को घर से बुलाकर ले लिया था।
जमानत पर बाहर आ गए थे
पुलिस ने चारों हत्यारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जो बाद में जमानत पर छूट गए थे। शुक्रवार को कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट ने शुक्रवार को उन्हें दोषी करार कर जेल भेज दिया था। शनिवार को अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।