मोदी के मन से क्यों उतर गए बालियान
मुजफ्फरनगर। केंद्रीय मंत्रिमंडल से विदा हुए सांसद डॉक्टर संजीव बालियान से कहां चूक हुई, जो वह मोदी की कसौटी पर खरे नहीं उतर पाए। लोकसभा चुनाव में जीत के बाद उन्हें युवा और किसान चेहरा माना गया था। आखिरकार तीन साल बाद भाजपा हाईकमान ने उन्हें क्यों किनारे किया, इस पर सियासी खेमों में गहनता से मंथन हो रहा है।
मुजफ्फरनगर से पहली बार सांसद बने संजीव बालियान के नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने के पीछे आरएसएस की खास भूमिका रही। कुटबा रैली के बाद से राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी खेमे में उनकी गिनती होने लगी थी। रालोद और भाकियू के गढ़ में किसान पृष्ठभूमि से जुड़े बालियान को कृषि मंत्रालय ही सौंपा गया। भाजपा उन्हें पार्टी का किसान चेहरा दिखाना चाहती थी। साथ ही युवा नेतृत्व के रूप में संजीव को आगे बढ़ाया गया। विधानसभा चुनाव में वह वेस्ट यूपी में भाजपा के स्टार प्रचारक बने। हेलीकॉप्टर से उनकी रैलियां जाट बेल्ट के आगरा और अलीगढ़ तक कराई गईं। मोदी ने बीच में मंत्रिमंडल का फेरबदल किया, तब भी उन्हें बरकरार रखा गया। पार्टी में उनके वजूद का असर कायम दिखा। नतीजे भी बालियान के पक्ष में गए। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का जिले में खाता भी नहीं खुला था, जबकि अबकी बार सभी छह सीटों पर कमल खिला। सत्ता परिवर्तन में मोदी फैक्टर भले ही प्रभावी रहा हो, लेकिन पार्टी से किसानों का जुड़ना बालियान के हक में गया। केंद्रीय जल संसाधन और नदी विकास राज्यमंत्री की जिम्मेदारी के बाद उन्होंने शुक्रताल को नमामि गंगे योजना से जोड़ने का काम किया। जिले को एनसीआर में शामिल कराने का मामला हो या फिर जानसठ के चितौड़ा में कृषि विज्ञान केंद्र की मंजूरी का मुद्दा, काम के पैमाने पर उनकी भागदौड़ कम नहीं रही।
मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में विकास के नजरिए से कई योजनाएं अधर में लटक सकती हैं। उपचुनाव में शहर सीट पर भाजपा की जीत के बाद बालियान मोदी की निगाहों में चढ़ गए थे। पश्चिम के सांसदों की एक बैठक भी संजीव के दिल्ली अशोका रोड आवास पर रखी गई, जिसमें खुद पीएम मोदी की मौजूदगी रही। तीन साल के बाद ऐसा क्या हुआ कि संजीव बालियान पीएम मोदी के मन से उतर गए। बालियान खेमे में भी इस बात पर गहन मंथन हो रहा है कि आखिर चूक कहां हुई। जिले में भाजपा संगठन का नया स्वरूप क्या रहेगा, यह भी देखने वाली बात रहेगी।
अब जिले में नहीं कोई मंत्री
मुजफ्फरनगर। नगर निकाय के चुनाव की आहट हो चुकी है, ऐसे में भाजपा के लिए जीत का सिलसिला बनाए रखना चुनौती होगा। वैसे भी बालियान के इस्तीफे के बाद जिले में कोई लालबत्ती नहीं रह गई है। योगी सरकार में सभी छह सीटें जीतने के बावजूद मंत्रिमंडल में किसी विधायक को जगह नहीं दी गई थी। इसकी वजह संजीव बालियान का केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल रहना था। पड़ोसी जिले शामली के थानाभवन विधायक सुरेश राणा को इसी गणित के आधार पर प्रदेश के मंत्रिमंडल में लिया गया था।