कवि सम्मेलन में कवियों ने सौहार्द का पैगाम दिया
मुजफ्फरनगर। पंजाब नेशनल बैंक के स्थापना दिवस को धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में कवि एवं शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेज में आयोजित समारोह में बताया गया कि पीएनबी की स्थापना 19 मई 1894 को हुई और वर्तमान में यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी वाणिज्यिक बैंक है। बैंक के मंडल प्रमुख डॉ. एमपी सिंह, उप मंडल प्रमुख वीरेंद्र गुलाठी और एचएस भल्ला ने प्रतिष्ठित खाताधारकों को सम्मानित किया। इसके अलावा शहर के प्रतिष्ठित व्यापारियों, समाजसेवियों एवं बैंक के रिटायर्ड अफसरों को शॉल, बुके व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सौहार्द का पैगाम दिया गया। प्रतिभा त्रिपाठी ने सरस्वती वंदना की। कलीम वफ़ा ने कहा- ये कभी हंसाती है, ये कभी रुलाती है। ज़िंदगी हर एक लम्हा मुझको आजमाती है। डॉ. प्रेरणा मित्तल ने कहा- हर मुश्किल का हल तू है। मुसीबतों के समंदर का साहिल तू है सुनाकर तालियां बटोरी। सुनील उत्सव ने कहा- मकानों के सुना किस्से, जमीनों की बता क़ीमत। इन्हें फूलों की भंवरों की हसीं बातों से क्या लेना। रामकुमार रागी ने हास्य रचनाओं से श्रोताओं को गुदगुदाया। डॉ. प्रतिभा त्रिपाठी ने पढ़ा- इस नए दौर की ये उलझन है। प्यार की हर किसी से अनबन है। अहमद मुजफ्फरनगरी ने जलने वालों को यूं भी जलाया करो। देख कर तुम हमें मुस्कुराया करो। सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। संचालन कर रहे रियाज साग़र ने नफरत का खेल तुझको मिटा देगा एक दिन। बेहतर है जहन से यह शरारत निकाल दे। सुनाकर भाईचारे का संदेश दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री राम ऑफ ग्रुप कालेज के चैयरमेन एाससी कुलश्रेष्ठ ने की।