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सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन

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खतौली(मुजफ्फरनगर)। बड़ा बाजार स्थित शांतिनाथ जैन मंदिर में चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतिम दिन विशेष पूजा अर्चना की गई। विधान की समस्त क्रियाएं अंतसमती और अर्चितमति माता के सानिध्य में संपन्न हुई।
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धर्मसभा में अंतसमति माता जी ने बताया कि इस विधान का आयोजन सर्व मंगल कामना के लिए किया गया है। हम आत्म शुद्धि के लिए अर्चना और आराधना करते है। भगवत जिन महार्चना का यह विधान कर्मों की निर्जरा का प्रतीक है। जीवन में सदैव समता को स्थान दो। सांसारिक चिंताओं से मुक्त होने का यही एक सहज उपाय है। महापुरुषों के आदर्शाें को जीवन अपनाना एवं सदैव उनका अनुकरण करना श्रेष्ठ कर्म है। चित्त की निर्मलता आत्मबोध में सहायक होती है। धन और यौवन का कभी अहंकार नहीं करना चाहिए। जीवन में अनुशासन एवं मर्यादा का पालन करना है। रात्रि में महाआरती का आयोजन तथा विशेष गुरू भक्ति का कार्यक्रम किया गया। मनोज, अरुण, पवन, सतीश, प्रवीण, सुशील, सुरेंद्र जैन, ममता, शीलचंद, मीनू, प्रमोद, श्रीपाल, दिनेश, मुकेश, विपिन, सुधा, राजारानी, गीता, नीरज जैन, अजय, अर्चना, अलका, अनुपम जैन आदि उपस्थित रहे।
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