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कॉमर्स और मैनेजमेंट के छात्र भी पढेंगे जीएसटी

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कॉमर्स और मैनेजमेंट के छात्र भी पढे़ंगे जीएसटी
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मुजफ्फरनगर (मुजफ्फरनगर)। एक जुलाई से लागू की गई एक देश-एक कर की नई टैक्स व्यवस्था को अब छात्र-छात्राएं भी बारीकी से पढ़ने के साथ समझेंगे। यूजी-पीजी के कॉमर्स और मैनेजमेंट कोर्स में जीएसटी पाठ्यक्रम शामिल किया गया है। कॉलेजों को यह पाठ्यक्रम इसी सत्र (2017-18) से पढ़ाना लाजिमी किया गया है। इसे पढ़ाने के लिए विशेषज्ञों के साथ वाणिज्यकर विभाग की भी मदद ली जाएगी।
वेस्ट यूपी के मेरठ-सहारनपुर मंडल के नौ जिलों में शिक्षा, परीक्षा और रिजल्ट देने की जिम्मेदारी चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कंधों पर है। विश्वविद्यालय से बढ़ी संख्या में कालेज जुड़े हैं। लखनऊ में 6 जुलाई को हुए कुलपति सम्मेलन में जीएसटी पाठ्यक्रम का मसौदा तैयार किया गया। अभी तक विवि की एडमिशन प्रक्रिया चालू है, जिसके चलते इस पाठ्यक्रम का शामिल किया है। कॉमर्स और मैनेजमेंट कोर्स में जीएसटी का नया विषय जोड़ा गया है। खास बात यह है कि इस विषय की पढ़ाई कालेज के शिक्षकों पर ही निर्भर नहीं होगी। कालेज प्रशासन को बैंकर्स, विषय विशेषज्ञ और वाणिज्यकर विभाग की भी इसे पढ़ाने के लिए सहायता लेनी होगी। अंडर ग्रेजुऐट और पोस्ट ग्रेजुऐट दोनों वर्ग के कॉमर्स, मैनेजमेंट, मैथ स्टडीज, मार्केटिंग आदि कोर्सों में जीएसटी का पाठ्यक्रम जोड़ा गया है। सीसीएसयू के सहायक प्रेस प्रवक्ता डॉ प्रशांत कुमार ने बताया कि जीएसटी पाठ्यक्रम इसी साल से प्रत्येक कालेज में जहां कॉमर्स, मैनेजमेंट के साथ रोजगारपरक की शिक्षा दी जा रही है। उन कालेजों में जीएसटी पढ़ाई भी अनिवार्य की गई है। उधर, वाणिज्य कर विभाग के जीएसटी मास्टर ट्रेनर डीएस गौतम ने बताया कि यह अच्छा कदम है। कालेज को विभाग की जिस स्तर पर भी जीएसटी के लिए आवश्यकता होगी, उसे पूरा किया जाएगा।
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कॉलेज में सेमिनार भी कराने होंगे
मुजफ्फरनगर। यूजी-पीजी के छात्रों को इसकी पढ़ाई के साथ बारीकि से समझने और प्रैक्टिकल रूप में लाने के लिए कालेजों को सेमिनार भी कराने होंगे। जिनमें वर्तमान की कर व्यवस्था वाली वस्तुओं, बाजार, ई-वेबिल, जीएसटी पोर्टल, माइग्रेशन के साथ अनेक बिंदुओं की सरल और पूर्ण जानकारी के लिए कालेज में महीने में दो सेमिनार कराने जरूर रहेंगे, जिसमें वाणिज्य कर विभाग अपनी सहायता देगा।
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शिकायत निवारण प्रकोष्ठ के निर्देश
मुजफ्फरनगर। यूजी-पीजी कालेजों को शिकायत निवारण प्रकोष्ठ के गठन किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। कालेज स्तर पर एक शिक्षक इसका नोडल अधिकारी होगा, जबकि दो शिक्षक सहायक के रूप में नियुक्त किए जाएंगे। छात्रों को अपनी शिकायत इस कमेटी को करनी होगी। यह कमेटी अल्पसंख्यक, समाज कल्याण के साथ कालेज में होने वाली छात्रों की परेशानी को हल करेगी।
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