उम्मीद थी कि उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार में अखिलेश अपनी कैबिनेट को अधिक युवा बनाने की कोशिश करेंगे। चर्चा भी यही थी कि मंत्रिमंडल विस्तार में अखिलेश को अपनी पसंद के चेहरों को शामिल करने की छूट मिलेगी।
पर, जो तस्वीर सामने आई है, उससे एक बार फिर यह साफ हो गया कि फैसलों में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की पसंद व नापसंद ने ही अहम भूमिका निभाई है।
बात चाहे राममूर्ति वर्मा व गायत्री प्रजापति को तरक्की देने की हो अथवा नारद राय व कैलाश को कैबिनेट मंत्री के रूप में मंत्रिमंडल में शामिल करने की। अखिलेश के यूथ एजेंडे की एक बार फिर हवा निकलती दिखाई दे रही है।
नए मंत्रियों के रूप में शामिल कैलाश 62 वर्ष के और नारद राय 52 साल के हैं। तरक्की पाने वाले गायत्री प्रजापति 50 वर्ष के हैं। सिर्फ राममूर्ति वर्मा ही 50 वर्ष के नीचे हैं। उनकी आयु 48 वर्ष की है।
विस्तार में उम्र को महत्व देकर यह साबित करने की कोशिश की गई है कि मुलायम अपने साथ के लोगों को नहीं भूल सकते। इसका प्रमाण खुद मंत्रिमंडल है। उम्र दराज लोगों की बात करें तो मानपाल सिंह सबसे बुजुर्ग 87 साल के हैं तो लगभग 30 वर्ष की आयु के नितिन अग्रवाल सबसे छोटे हैं।
महिलाओं को अनदेखी
पिछले दिनों एक कार्यक्रम में जब सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने यह कहा कि महिलाओं की अनदेखी ठीक नहीं है। महिलाएं बड़ी मेहनत व विपरीत परिस्थितियों में आगे बढ़ती हैं। इसलिए इनको आगे बढा़ने की कोशिश करनी चाहिए।
तब सभी को लगा था कि महिलाओं की अनदेखी का युग खत्म होने वाला है। आगे महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाया जाएगा। पर, यह उम्मीद हकीकत में तब्दील नहीं हो पाई।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को छोड़ 57 सदस्यीय मंत्रिमंडल में सिर्फ एक महिला अरुणा कोरी ही हैं। इसके अलावा किसी अन्य चेहरे को मंत्रिमंडल में भागीदारी नहीं मिल पाई , जबकि सपा में महिला विधायकों की संख्या 19 है।