पहले राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ मुलायम सिंह का प्रत्याशी न उतारने का ऐलान, उसके बाद मैनपुरी में मुलायम सिंह यादव के खिलाफ भी कांग्रेस ने यही किया।
उप चुनाव में डिंपल यादव को 80 हजार मतों से हराकर चुनाव जीतने वाले राज बब्बर ने भी फीरोजाबाद का मैदान छोड़ दिया और गाजियाबाद चले गए। राजनीतिक हल्कों में इसे कांग्रेस का सपा को वॉक ओवर बताया जा रहा है।
2009 के आम चुनाव में यहां से अखिलेश यादव (मुख्यमंत्री) चुनाव जीते थे। उन्होंने इस्तीफा देकर उप चुनाव में अपनी पत्नी डिंपल यादव को मैदान में उतारा। तब कांग्रेस से राजबब्बर ने यहां ताल ठोंक कर सपा की साइकिल में ऐसा पंजा अड़ाया कि पूरे देश की नजर सुहाग नगरी पर टिक गई थी।
एक तरफ सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की प्रतिष्ठा दांव पर थी तो दूसरी तरफ उनके सामने सपा से ही अपना राजनीतिक कैरियर शुरू करने वाले फिल्म स्टार राजबब्बर मैदान में थे। चुनाव में बाजी राज बब्बर के हाथ लगी और 25 साल बाद उन्होंने कांग्रेस को इस सीट पर जीत दिलाई।
मुलायम को किया खुश
कार्यकर्ता इस बार भी उनके चुनाव को लेकर काफी उत्साहित थे। हाल ही में राज बब्बर की उपलब्धियों का बखान करते हुए एक किताब भी प्रकाशित कराई। राजबब्बर यहीं से चुनाव लड़ने की बात भी कहते रहे। अब अचानक जीती हुई सीट पर दावा छोड़कर राजबब्बर गाजियाबाद चले गए।
फीरोजाबाद में सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव चुनाव लड़ रहे हैं और डेढ़ साल से यहां सक्रिय हैं। ऐसे में राज बब्बर चुनाव लड़ते तो अक्षय के लिए मुसीबत बन सकते थे। फीरोजाबाद में अक्षय के सक्रिय होते ही राजबब्बर ने यहां से दूरी बनाना शुरू कर दिया था। अब सीट भी छोड़ दी।
मोदी की आंधी?
सपा जिलाध्यक्ष अजीम भाई कहते हैं पूरा क्षेत्र जानता है कि राज बब्बर ने कुछ नहीं किया, जो वादे किए एक भी पूरा नहीं किया। इस बार उन्हें मालूम था कि क्या हश्र होने वाला है।
जनता के डर से वह मैदान छोड़ गए। जहां तक सपा को वॉक ओवर देने की बात है, इसमें कोई दम नहीं। वह पहले ही डिंपल यादव के खिलाफ चुनाव क्यों लड़ते। कांग्रेस के एआईसीसी अतुल चतुर्वेदी का कहना है कि सांसद राजबब्बर एक बडे़ नेता हैं।
उन्होंने जनपद में बहुत विकास कराया। पार्टी को उनकी उपयोगिता अब गाजियाबाद में महसूस हुई होगी इस लिए उन्हें गाजियाबाद से प्रत्याशी बनाया हैं। लेकिन आम कार्यकर्ताओं की इच्छा यही थी कि वह यहीं से चुनाव लडे़।
निश्चित रूप से उनका गाजियाबाद जाना कांग्रेस के आम कार्यकर्ता अच्छा नहीं लगा और इससे निराशा हुई हैं। भाजपा विधायक और लोकसभा चुनाव प्रभारी मनीष असीजा का कहना है कि पूरा देश नरेंद्र मोदी को पीएम देखना चाहता है। यह जन आकांक्षा का भाव अब तूफान का रूप धारण कर चुका है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण एक फिल्म स्टार का जीती हुई सीट छोड़ना है।
डिपंल को हराया था 80,000 से भी ज्यादा वोटों से
बसपा प्रत्याशी विश्वदीप सिंह कहते हैं कि राज बब्बर राष्ट्रीय स्तर के नेता हैं। गाजियाबाद से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह चुनाव लड़ चुके हैं। कांग्रेस ने बब्बर को उनके कद के हिसाब से गाजियाबाद सीट से उतारा है। वैसे कांग्रेस किसको टिकट दे किसको न दे यह पार्टी का अंदरूनी मामला है।
राज बब्बर (कांग्रेस)-------312728
डिंपल यादव (सपा)-------227385
एसपी सिंह बघेल (बसपा)-------213537