उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री के सामने प्रदेश के विकास का एजेंडा पेश कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि 12वीं पंचवर्षीय योजना में साढ़े आठ प्रतिशत विकास दर हासिल करने के लिए लगभग 16.70 लाख करोड़ रूपए निवेश की जरूरत होगी।
वहीं पेट्रोल और डीजल के दामों में वृद्घि की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से डीजल की कीमत नहीं बढ़ाने की अपील की है। अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार को कहा है कि छोटे किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए दाम बढ़ाना ठीक नहीं है। साथ ही किसानों के लिए सस्ते कर्ज और बिजली परियोजनाओं के लिए केंद्र से कोयला आवंटन की मांग की गई है। तो बुंदेलखंड, पूर्वांचल और रूहेलखंड क्षेत्र में भी एम्स जैसे मेडिकल संस्थान केंद्र की ओर से खोलने पर जोर दिया गया है।
यही नहीं, अखिलेश ने योजना आयोग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा करते हुए कहा कि राज्यों से बिना राय लिए उनकी क्षेत्रवार वित्तीय जरूरत का खाका बनाना ठीक नहीं है। इस परंपरा को बदला जाना चाहिए।
10.9 फीसदी की विकास दर हासिल करने का लक्ष्य
मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए आखिलेश यादव ने कहा कि कृषि के लिए 4.9, उद्योग के लिए 7.1 और सेवा क्षेत्र के लिए 10.9 फीसदी की विकास दर हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश को इसके लिए 16.70 करोड़ रूपए निवेश की जरूरत होगी।
अखिलेश ने कहा कि अगर केंद्र सरकार का सकारात्मक सहयोग मिला तो राज्य सरकार लक्ष्य को जरूर हासिल कर लेगी। मुख्यमंत्री ने राज्यों को केंद्रीय सहायता के रूप में मिलने वाली सकल बजटीय सपोर्ट में कमी करने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्यों के वित्तीय संसाधन एफआरबीएम एक्ट के जरिए से और भी सीमित कर दिया गया है। इसमें ढील दी जानी चाहिए।
केंद्र सरकार से सहयोग की अपील
अखिलेश ने कहा कि राज्यों से विचार विमर्श किए बिना अपने स्तर से योजना आयोग क्षेत्रवार वित्तीय वितरण का खाका तैयार कर लेता है। राज्य की ओर से अपनी प्राथमिकताओं और विकास की जरूरतों के लिए संसाधन जुटाने की व्यवस्था को योजना आयोग द्वारा कम करना सही नहीं है। मुख्यमंत्री ने लखनऊ से बहराइच होते हुए नेपाल सीमा पर रुपईडीहा तक और गोरखपुर से बनारस सड़क को चार लेन करने की जरूरत पर बल देते हुए केंद्र सरकार से सहयोग की अपील की। साथ ही कुशीनगर और आगरा के पास अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण में केंद्र की मदद मांगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री का ध्यान दिलाया कि सरकार की 16 हजार मेगावाट अतिरिक्त विद्युत क्षमता और निजी क्षेत्र से बनने वाली सात विघुत परियोजनाओं के लिए कोयला आवंटन की मांग पर भी अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।