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Moradabad News: दिखावे के लाल सिलिंडरों के बीच खतरे में आपके लाल

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मुरादाबाद। महिला अस्पताल में लगे अग्निशमन यंत्रों के बीच आपके नवजात बच्चों की सुरक्षा की गारंटी नहीं है। जिला अस्पताल व महिला अस्पताल के पास फायर एनओसी नहीं है। साथ ही महिला अस्पताल परिसर में लगे कई अग्निशमन यंत्र एक्सपायर हो चुके हैं। वहीं फायर सिलिंडरों का प्रेशर खत्म हो गया है।
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यह स्थिति तब है कि जब यहां प्रतिदिन औसतन 15 से अधिक गर्भवती महिलाएं भर्ती होती हैं। साथ ही कम वजन वाले नवजात बच्चों को विशेष देखभाल के लिए जिस एसएनसीयू में भर्ती किया जाता है। वह भी इसी पुरानी बिल्डिंग में ही है। हाल ही में झांसी मेडिकल काॅलेज में आग लगने के बाद शासन से सभी अस्पतालों के दोबारा ऑडिट का आदेश जारी हुआ है, लेकिन महिला अस्पताल के पुराने ऑडिट में मिली खामियां ही अब तक दूर नहीं हो पाई हैं।
अस्पताल की फायर एनओसी दो साल से लटकी है, जबकि एमसीएच विंग के जिस नए भवन में डिलीवरी होती हैं, वहां की एनओसी कोरोना काल में ही मिल गई थी। जानकारों का कहना है कि जन्म के बाद कम वजन, पीलिया, सांस लेने में तकलीफ या अन्य गंभीर समस्या वाले बच्चों को एसएनसीयू में रखा जाता है। यह एसएनसीयू पुराने भवन में है और यहां आग से बचाव के लिए मजबूत इंतजाम नहीं हैं।
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झांसी की घटना से पहले मई में दिल्ली के न्यू बॉर्न बेबी केयर अस्पताल में आग लगी थी। तब भी महिला अस्पताल की फायर एनओसी को लेकर कागजी भागदौड़ की गई थी, लेकिन परिणाम अब तक शून्य है। आग बुझाने के लिए पानी की जो पाइपलाइन लगी है, उसमें भी कई खामियां बताई गई हैं। अधूरी व्यवस्थाओं के बीच महिला अस्पताल प्रबंधन दोबारा ऑडिट की तैयारियों में लग गया है।
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23 को खत्म हो रही जिला अस्पताल के अग्निशमन यंत्रों की मियाद

जिला अस्पताल परिसर में लगे अग्निशमन यंत्रों की मियाद भी 23 नवंबर को पूरी हो रही है। कार्बनडाइ ऑक्साइड वाले सिलिंडरों को दोबारा भरे जाने का समय आ गया है। जिला अस्पताल प्रबंधन ने इसके लिए तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। एसआईसी डॉ. संगीता गुप्ता का कहना है कि ठेकेदार से सभी सिलिंडरों को चिह्नित करा लिया गया है। हम जल्द ही इन्हें रीफिल करा लेंगे। इसके अलावा जिला अस्पताल में फायर एनओसी के लिए तीसरी व चौथी मंजिल पर मानकों के अनुसार काम कराया जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद एनओसी के लिए आवेदन किया जाएगा। प्रबंधन का दावा है कि पहली व दूसरी मंजिल पर मानकों के अनुसार कार्य हो चुका है।


कई निजी अस्पतालों को भी मिल चुका है नोटिस
जिले में करीब 400 अस्पताल, नर्सिंग होम व क्लीनिक सीएमओ कार्यालय में पंजीकृत हैं। इनमें से 150 से ज्यादा फायर एनओसी के दायरे में आते हैं, जबकि एनओसी सिर्फ 60 के पास है। अग्निशमन विभाग की ओर से कुछ अस्पतालों को नोटिस दिया गया है। इसके बावजूद कुछ निजी अस्पताल संचालक एनओसी के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। प्रश्न यह भी है कि बिना फायर एनओसी के इन अस्पतालों का पंजीकरण कैसे हो गया। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस मामले में अग्निशमन विभाग का सहयोग करने का दावा कर चुके हैं।



अस्पताल परिसर में लगे सभी अग्निशमन यंत्रों की चेकिंग व जरूरत होने पर रीफिलिंग के लिए कार्यदायी संस्था को पत्र लिखा है। इसी सप्ताह यह कार्य पूरा हो जाएगा। हम पुराने भवन की फायर एनओसी के लिए भी प्रयास कर रहे हैं।
- डॉ. निर्मला पाठक, सीएमएस महिला अस्पताल


अग्निशमन यंत्रों में उनके प्रकार के अनुसार रीफिलिंग होती है। कुछ हर साल रीफिल किए जाते हैं, जबकि कुछ को तीन साल में किया जाता है। सिलिंडर पर लिखी तिथि के अलावा प्रेशर की सुई भी रीफिलिंग की जरूरत बता देती है। सुई यदि लाल निशान पर है तो रीफिलिंग होनी जरूरी है।
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- कृष्ण कांत ओझा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
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