संभल के मोहल्ला हल्लू सराय में कन्नौजिया ठाकुर बिरादरी तीज उत्सव नहीं मनाती। इसके पीछे एक लंबी युद्ध से जुड़ी कहानी है। जिसमें एक राजा की इस दिन मौत हो गई थी। उसी शोक को अब तक मनाया जाता है। महिलाएं मेंहदी नहीं लगाती हैं और चूड़ियां भी उतार कर रख देती हैं। इस शोक को इस तरह मनाया जाता है मानो राजा की मौत आज ही हुई हो। एक ओर देश में इस दिन महिलाएं मेंहदी लगाकर श्रृंगार करती हैं। तो वहीं दूसरी ओर हल्लू सराय में इस उत्सव पर गमगीन माहौल होता है। पूरे देश में यह अलग शोक है। जिसको मनाया जाता है।
दरअसल संभल के मोहल्ला हल्लू सराय में कन्नौजिया ठाकुर बिरादरी के करीब 600 परिवार रहते हैं। जो तीज उत्सव पर शोक मनाते हैं। इसी मोहल्ले के बुजुर्ग भगवान दास बताते हैं कि अब से करीब 800 वर्ष पूर्व कन्नौज के राजा लाखन सिंह की पृथ्वी राज चौहान ने हत्या करा दी थी। दरअसल राजा पृथ्वी राज चौहान की बेटी बेला का विवाह कन्नौज के बिरमा के साथ हुआ था। विवाह के बाद गौना की रस्म होनी थी। गौना कराने के लिए बिरमा के साथ कन्नौज के राजा लाखन सिंह संभल आए थे। इस दौरान धोखे से बिरमा और लाखन सिंह की हत्या कर दी गई थी। इसी बात को लेकर राजा लाखन सिंह की सेना का राजा पृथ्वी राज चौहान की सेना से युद्ध हुआ। जिसमें राजा लाखन सिंह की सेना को पराजय का मुंह देखना पड़ा। जो सेना बची उस सेना के तमाम जवान वापस कन्नौज नहीं गए। वे संभल के हल्लू सराय में बस गए।
उस समय हल्लू सराय वन हुआ करता था। राजा की मौत का गम ऐसा रहा कि सेना के बचे हुए सिपाही कभी कन्नौज नहीं लौटे। उस दिन से अब तक तीज उत्सव पर राजा लाखन सिंह और बिरमा की मौत का शोक मनाया जाता है। जब कन्नौज के राजा की मौत की खबर उनके मित्र महोबा के राजा ऊदल सिंह को हुई तो वे सिरसा के राजा मलखान सिंह के साथ संभल में पृथ्वी राज से युद्ध करने के लिए आए। लेकिन पृथ्वी राज चौहान की सेना के हाथों उनकी भी मौत हो गई। बुजुर्गों की बात पर यकीन मानें तो राजा पृथ्वी राज चौहान की बेटी बेला की सती समाधि नगर में स्थित है।