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300 करोड़ गए कहां

Sat, 19 Nov 2016 02:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
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mall - फोटो : mall
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बाजारों में सन्नाटा पसरा है और पब्लिक बैंक की कतारों में लगी है। एटीएम पर भीड़ रोजाना कैश निपटने तक खत्म नहीं होती। संसद तक शोर मचा है कि पब्लिक  की जेबें खाली हैं। फाके की नौबत हो या बीमारी से हुई मौत.. सबकुछ बड़े नोटों के सिर मढ़ा जा रहा है।
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लेकिन जरा इस शोर शराबे और बैंकों के बाहर लगी भीड़ से ध्यान हटाकर बैंकों के आंकड़ों पर गौर करें तो तस्वीर एकदम उलट नजर आती है। अकेले मुरादाबाद की ही बात करें तो बड़े नोटबंदी के बाद से शहर के 140 बैंक 80 करोड़ रुपये की पुरानी करेंसी एक्सचेंज कर चुके हैं।

20 करोड़ रुपये पब्लिक एटीएम बूथों से निकाल चुकी है और इसी वक्त में 200 करोड़ रुपये बैंकों से डायरेक्ट विड्राल के जरिए निकाले जा चुके हैं। अब बड़ा सवाल ये है कि 300 करोड़ रुपये बाजार में आने के बाद भी हाय तौबा मची है तो ये 300 करोड़ आखिर गए कहां? 
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 नोटबंदी के बाद हालात धीरे धीर सुधर रहे हैं। लोगों के हाथ में करेंसी पहुंच रही है। हर दिन करोड़ों रुपये लोगाें की जेब में जा रहे हैं। बैंकों के साथ एटीएम भी दो हजार का नया नोट देने लगे हैं। लिहाजा एटीएम से पैसा निकालना आसान हुआ है। सरकार ने एटीएम से कैश निकालने की लिमिट भी बढ़ा दी है।

लेकिन बाजार में धंधा अब भी मंदा है और मार्केट में 70 फीसदी तक की गिरावट है। आठ नवंबर को हजार - पांच सौ के नोट बंद करने की घोषणा की गई थी। नौ नवंबर को बैंकों में कोई लेन- देन नहीं हुआ। दस नवंबर को बैंक खुलते ही जैसे सभी लोग बैंकों के बाहर जाकर खड़े हो गए।

बैंकों के बार लगी लंबी लंबी लाइन लगी हुई हैं। हर दिन बैंकों से करोड़ों रुपये के नोट एक्सचेंज करने के साथ ही विड्राल हो रहा है। विड्राल की सीमा 24 हजार करने के साथ ही बैंकाें से निकासी अचानक से कई गुना बढ़ गई। वहीं करंट एकाउंट की सीमा 50 हजार किए जाने से बाजार में भी पैसा बढ़ा है।

बैंकों के आंकड़ों पर गौर करें तो हर दिन औसतन 30 करोड़ रुपये के नए और छोटे नोट बैंक पब्लिक को बांट रहे हैं। बैंकों के आंकड़े बताते हैं कि नोटबंदी के बाद से अभी तक शहर की पब्लिक को 300 करोड़ रुपये बैंकों से दिए जा चुके हैं।
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लेकिन इसके बावजूद बाजारों में पसरा सन्नाटा और बैंकों के बाहर लगी कतारों को देख सवाल उठना लाजिमी है कि ये 300 करोड़ आखिर गए कहां? 
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