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अभद्र टिप्पणी केस: पूर्व सांसद जयाप्रदा के खिलाफ वारंट जारी, मुरादाबाद कोर्ट में 30 सितंबर को होगी सुनवाई

Thu, 19 Sep 2024 09:54 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

अभद्र टिप्पणी केस में कोर्ट में पेश नहीं होने पर रामपुर की पूर्व सांसद जयाप्रदा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया है। वह कोर्ट के आदेश के बाद भी बयान दर्ज करवाने के लिए नहीं पहुंच रही है। अब इस केस की सुनवाई 30 सितंबर को होगी। 
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रामपुर की पूर्व सांसद जयाप्रदा - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अभद्र टिप्पणी मामले में अभिनेत्री एवं रामपुर की पूर्व सांसद जयाप्रदा बयान देने कोर्ट में पेश नहीं हुईं। अदालत ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करते हुए 30 सितंबर की तारीख लगा दी है। वहीं पक्ष में गवाही देने के लिए अदालत में जयाप्रदा के अधिवक्ता ने प्रार्थना पत्र पेश किया।

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बहस सुनने के लिए अदालत ने चश्मदीद गवाह पर पांच सौ रुपये का जुर्माना लगाते हुए प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। 2019 लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद कटघर क्षेत्र के मुस्लिम डिग्री कॉलेज में आयोजित सम्मान समारोह में रामपुर के पूर्व सांसद आजम खां, मुरादाबाद के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन समेत अन्य सपा नेता शामिल हुए थे।

आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान रामपुर की पूर्व सांसद जयाप्रदा पर अभद्र टिप्पणी की गई थी। इस मामले में रामपुर निवासी मुस्तफा हुसैन ने आजम खां, डॉ. एसटी हसन, अब्दुल्ला आजम, फिरोज खां, आयोजक मोहम्मद आरिफ, रामपुर के पूर्व चेयरमैन अजहर खां के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था।
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मामले की सुनवाई एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट एमपी सिंह की अदालत में की जा रही है। विशेष लोक अभियोजक मोहनलाल विश्नोई ने बताया कि इस मामले में जयाप्रदा को कोर्ट में हाजिर होकर अपने बयान दर्ज कराने थे। लेकिन वह बुधवार को कोर्ट में पेश नहीं हुईं।

इसके बाद अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। पिछली तारीख पर जयाप्रदा के वकील ने घटना के वक्त मौजूद चश्मदीद गवाह सैफ उल्ला खां को तलब करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। जिस पर बहस होने के बाद अदालत ने प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया और गवाह पर पांच सौ रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

अदालत का समय बर्बाद करने पर लगा जुर्माना

अभद्र टिप्पणी के मामले में वादी पक्ष की ओर से 12 सितंबर को चश्मदीद गवाह के बयान कराने के लिए प्रार्थना पत्र अदालत में पेश किया गया था। जिस पर दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। इस तरह के प्रार्थना पत्र पेश कर अदालत का समय बर्बाद किया गया है। अदालत ने प्रार्थना पत्र खारिज करने के साथ-साथ पांच सौ रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

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