दाखिले से पहले मदरसा प्रबंधन द्वारा आठवीं की छात्रा से कौमार्य प्रमाणपत्र मांगने का मामला शासन तक पहुंच गया है। इस मामले में एक खुफिया एजेंसी ने भी जानकारियां जुटाईं हैं। इस मामले में जांच टीम साेमवार को डीएम को अपनी गोपनीय रिपोर्ट सौंपेगी। चंडीगढ़ के मनीमाजरा क्षेत्र में रहने वाले टेलर ने पुलिस को बताया कि उसने वर्ष 2024 में अपनी बेटी का दाखिला पाकबड़ा थानाक्षेत्र के लोधीपुर राजपूत स्थित मदरसा जामिया एहसान-उल-बनात में कक्षा सात में कराया था।
मुरादाबाद पुलिस की हिरासत में एडमिशन प्रभारी
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बेटी ने सातवीं कक्षा पास कर ली। इस बार आठवीं कक्षा में दाखिला होना था। टेलर की पत्नी 21 अगस्त को बेटी को लेकर पाकबड़ा के मदरसे पहुंची। वह आठवीं कक्षा में दाखिला करने के लिए प्रधानाचार्य रहनुमा और एडमिशन सेल प्रभारी मो. शाहजहां से मिलीं। आरोप है कि दोनों ने पहले 35 हजार रुपये जमा करा लिए। इसके बाद काैमार्य प्रमाणपत्र की मांग की। इसकी जानकारी मिलने पर पिता भी पहुंच गए।
माैके पर पहुंचे अधिकारी
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आरोप है है कि उनके साथ मदरसा स्टाफ ने अभद्रता की और धक्के मारकर तीनों को बाहर निकाल दिया। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर एडमिशन सेल के प्रभारी एवं बिहार के पूर्णिया जिले के रानी पत्रा थाना क्षेत्र के पुरखरिया निवासी मो. शाहजहां को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस प्रधानाचार्य रहनुमा और अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।
मुरादाबाद के मदरसे में जांच करते अधिकारी
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एसपी सिटी एसपी सिटी कुमार रण विजय सिंह ने बताया कि इस प्रकरण मे पुलिस गहनता से जांच कर रही है। अभी काफी तथ्य सामने आ सकते हैं। लंबे समय से मदरसा और कॉलेज एक ही परिसर में चल रहा है। इधर प्रदेश की खुफिया एजेंसी ने भी इस प्रकरण में स्थानीय लोगों से पूछताछ कर एक रिपोर्ट तैयार की है। यह रिपोर्ट मंडलीय पुलिस क्षेत्रीय कार्यालय (एसपीआर) से सीधे शासन को भेजी जाएगी।
मुरादाबाद के मदरसे में जांच करते अधिकारी
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पुलिस जांच के बाद होगी विदेशी फंडिंग की जांच
जिला प्रशासन पुलिस जांच रिपोर्ट के आधार पर मदरसा जामिया एहसान-उल-बनात के विदेशी फंडिंग की जांच कराएगा। अभी पुलिस जांच के लिए आवश्यक तथ्य जुटाने में लगी है। डीएम अनुज सिंह ने पाकबड़ा के मदरसा प्रबंधन द्वारा आपत्तिजनक रिपोर्ट मांगे जाने की जानकारी मिलने पर एसडीएम सदर डॉ. राम मोहन मीणा, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी दिलीप कुमार और जिला विद्यालय निरीक्षक को जांच के लिए भेजा।
मुरादाबाद के मदरसे में जांच करते अधिकारी और पुलिस
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जांच के दौरान पाया गया कि प्रबंधन ने मदरसा की मान्यता ली है। बिल्डिंग भी सही है। मदरसे में 20 छात्र ही मौजूद हैं। बाकी छात्र- छात्राओं को जामिया एहसान उल बनात इंटर कॉलेज में शिफ्ट किया गया है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने बताया कि शिकायतकर्ता छात्रा का भी नामांकन इंटर कॉलेज में है। चूंकि एडमिशन सेल प्रभारी मो. शाहजहां जेल में है।
पाकबड़ा पुलिस कर रही जांच
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इस कारण ज्यादा कागजात नहीं मिला है। सोमवार शाम तक जांच टीम अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंपेगी। जिला प्रशासन से किसी ने अभी तक फंडिंग को लेकर शिकायत नहीं की है। पता चला है कि करीब 12 साल पहले शहर के कई मदरसों को खाड़ी देशों से फंडिंग की गई थी लेकिन इसकी पुष्टि जांच के आधार पर होगी।
पीड़ित पिता
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अभी पुलिस शिकायत के आधार पर जांच कर रही है। इस मामले में पुलिस रिपोर्ट के आधार पर विदेशी फंडिंग की जांच होगी। इस जांच के लिए बैंक खाता की डिटेल लिखित तौर पर मंगाना पड़ेगा। पुलिस अधिकारियों से बातचीत कर इस मामले में शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। - अनुज सिंह, डीएम मुरादाबाद
मुरादाबाद स्थित मदरसा संचालकों पर गंभीर आरोप
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घरेलू मामले में मदरसे को किया जा रहा बदनाम : डॉ. एसटी हसन
मदरसा जामिया एहसानुल बनात में आठवीं की छात्रा से वर्जिनिटी सर्टिफिकेट (काैमार्य प्रमाणपत्र) मांगे जाने के विवाद को पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने घरेलू मामला बताया है। उन्होंने मदरसा प्रबंधन का समर्थन करते हुए कहा कि यह पूरा विवाद असल में पारिवारिक है लेकिन इसे मदरसे के खिलाफ माहौल बनाने के लिए तूल दिया जा रहा है।
पूर्व सांसद के मुताबिक यह मामला मियां-बीवी के झगड़े से जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि पत्नी ने खुद अपने पति पर बेटी से अनुचित संबंधों का आरोप लगाया है। ऐसे हालात में यदि छात्रा मदरसे में रहकर किसी अप्रत्याशित स्थिति में पहुंच जाती तो निशाना संस्था बनती।
इसी वजह से मदरसे ने छात्रा की चिकित्सीय जांच की बात कही थी ताकि भविष्य में कोई विवाद न खड़ा हो। मदरसे की नीयत लड़की को अपमानित करने की नहीं थी, बल्कि संस्थान की साख बचाने की थी। इस मामले को बेवजह तूल देकर धर्म और शिक्षा दोनों को विवाद के घेरे में लाया जा रहा है।