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अचानक रुकी बारिश ने बिगाड़ा खेल, वायरल-टाइफाइट के अागे सब फेल

Fri, 16 Sep 2016 11:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
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स्वास्थ्य - फोटो : demo
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 जिला अस्पताल समेत जिले के लगभग सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर बुखार से पीड़ित मरीजों की लाइनें लगी हैं। सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर औसतन रोजाना बुखार से पांच सौ मरीज पहुंच रहे हैं। बुखार से पीड़ित इन मरीजों में सैकड़ों की संख्या में मलेरिया और टाइफाइड पाया गया है। पिछले दो महीनों में मलेरिया का प्रकोप बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की तमाम कोशिशों के बाद भी वायरल फीवर और मलेरिया पर रोक नहीं लग पा रहा है। बुखार से जनपद में करीब 55 मरीजों की जान जा चुकी है। इनमें महानगर में 2, डिलारी-8, कुंदरकी-20, ठाकुरद्वारा-3, भगतपुर-5, बिलारी-4, और मूंढ़ापांडे में 13 बुखार के मरीजों की मौत हो चुकी हैं। शहर के नर्सिंग होम में डेंगू के मरीज भी पहुंच रहे हैं। वहीं डॉक्टर चिकिनगुनिया को लेकर भी सतर्क हो गए हैं।

जनपद के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में पिछले दो महीनों से वायरल फीवर के मरीजों की लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं वहीं इन मरीजों में मलेरिया का पाया जाना और भयावह है। पिछले दो महीनों में लिये गये ब्लड सैंपलों में 109 बुखार के मरीजों में मलेरिया पाया गया। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग मलेरिया पर रोक लगाने में सफल नहीं हो पाया है। मलेरिया के मरीजों में 6 मरीजों को फैल्सीफेरम (दिमागी मलेरिया) है। अकेले जिला अस्पताल में अगस्त महीने में 86 मलेरिया के मरीज पाये गये। इसके बाद से स्वास्थ्य विभाग ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में मलेरिया के लक्षण वाले मरीजों के ब्लड सैंपल लेने शुरू किये बावजूद इसके अभी भी मलेरिया के मरीजों की संख्या में कमी नहीं आई है। सितंबर में 12 तारीक तक मलेरिया के 28 मरीज पाये गये हैं।
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मलेरिया का प्रकोप फैलने के बाद से जब स्वास्थ्य विभाग ने ब्लड सैंपल लेने शुरू किये तो दो माह में 576 मरीज टाइफाइड से पीड़ित पाये गये। अकेले जिला अस्पताल में 376 मरीज टाइफाइड के पाये गये। वहीं मुरादाबाद देहात क्षेत्र के निजी अस्पतालों से मिली जानकारी के अनुसार जनपद में करीब 158 मरीजों में टाइफाइड पाया गया। बुखार से मरने वाले मरीजों में अधिकांश की मौत टाइफाइड बताई जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है मौत के आंकड़े
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जनपद में एक भी व्यक्ति की मौत बुखार से नहीं हुई है। सभी मरीजों को पहले से अन्य गंभीर बीमारियां थीं, जब उन्हें बुखार आया तो उनकी प्रतिरोध क्षमता कम हो गई और शरीर के अंगों ने काम करना बंद कर दिया। इसलिए उनके पास बुखार से मरने वाले मरीजों का कोई आंकड़ा नहीं है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष और एमडी मेडिसिन नितिन बत्रा का कहना है कि बुखार से मौत होती है। बुखार बीमारी नहीं बल्कि लक्षण है। एक तरह का इंफेक्शन है। अगर व्यक्ति को प्रोटोजोवा इंफेक्शन होगा तो उसे मलेरिया हो जाएगा। वायरल इंफेक्शन में डेंगू और चिकिनगुनिया हो जाएगा। वहीं वैक्टिरियल इंफेक्शन में निमोनिया, टाइफाइड जैसी बीमारियां हो जाएंगी और इन बीमारियों में मरीजों की मौत हो सकती है। वहीं पहले से बीमार मरीजों को बुखार आने पर उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर मौत की संभावना बन जाती है। 

अचानक रुक गई बारिश से आई आफत
विशेषज्ञों ने बताया कि वायरल फीवर का जो प्रकोप जारी है उसका मुख्य कारण मौसम है। अगस्त में शुरू हुई बारिश के अचानक रुक जाने से वातावरण में नमी नहीं बन पाई। इस कारण वायरल और वैक्टीरियल इंफेक्शन शुरू हो गये। इसके बाद प्रोटोजोवा इंफेक्शन भी हावी हो गया और लोग मलेरिया का शिकार होने लगे।

जिला अस्पताल में 187 बेड पर 250 मरीज
पिछले दो महीनों में वायरल बुखार से पीड़ित पहुंचे मरीजों को भर्ती करना जिला अस्पताल प्रशासन के लिए मुसीबत बन गई। 187 बेड के अस्पताल में मजबूर 250 मरीजों को भी भर्ती करना पड़ा। एक बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज किया गया। सितंबर में भी यह सिलसिला जारी है। वहीं रैन बरेसा में बीस बेड बढ़ाने के बाद भी स्थिति काबू में नहीं आई है। पिछले दिनों वायरल फीवर से पीड़ित गंभीर मरीजों को बेड के अभाव में स्ट्रेचर पर ड्रिप चढ़ाई गई।

नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की तैयारी
देर से ही सही लेकिन नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने वायरल और मलेरिया के प्रकोप को रोकने के लिए काम शुरू कर दिया है। कैंप लगाकर दवा देने से लेकर विभागों ने फॉगिंग, एंटी लार्वा, एंटी मलेरिया जैसे कीटनाशकों का छिड़काव शुरू कर दिया है। इससे मलेरिया को फैलने से रोका जा सकता है।

इन बातों का रखें ध्यान --------
बुखार आने पर शरीर का तापमान कम करना जरूरी
मरीज के हाथ-पैर ठंडे पानी से धोएं
मरीज को कंबल या रजाई में ढक कर न रखें
खाने के लिए ताजा और सुपाच्य भोजन देते रहें
दिनभर में कम से कम चार लीटर पानी पीएं
घर में साफ-सफाई का ध्यान रखें
बुखार की एक मात्र दवा पैरासीटामोल के अलावा कोई दवा न लें
पेन किलर दवा किसी भी शर्त में न लें
दो दिनों तक बुखार ठीक नहीं होने पर प्रशिक्षित डाक्टर को दिखाएं
खून की जांच अवश्य कराएं

बयान 
पिछले दस दिनों से वायरल फीवर के मरीजों में कमी आई है। लेकिन मलेरिया के मरीजों की संख्या चिंताजनक है। मलेरिया को रोकने के लिए सभी संभव प्रयास किये जा रहे हैं। 
- अशोक कुमार, सीएमएस 

बयान
वायरल फीवर, मलेरिया, टाइफाइड के मरीजों में कमी आ रही है। सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाइयां उपलब्ध हैं। विभाग की  टीम दूरस्थ क्षेत्रों मे जाकर कैंप लगा रही हैं। लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा रहा है। 
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- रंजन गौतम, उप मुख्य चिकित्साधिकारी

बयान
बुखार और वायरल के मरीजों की संख्या तो अच्छी खासी है। लेकिन अभी चिकिनगुनिया और डेंगू के पाजिटिव केस नहीं मिले हैं। वायरल भी दस दिन से ज्यादा परेशान कर रहा है।
- डा. शरद गुप्ता, कोठीवाल हास्पिटल  


आयुर्वेद से उपचार ----

वायरल फीवर : गिलोय घन वटी, लक्ष्मी विलास रस

चिकिनगुनिया : महासुदर्शन वटी, गिलोय घन वटी

डेंगू : गेहूं-ज्वारे का रस, पपीते के पत्तों का रस

मलेरिया : संजीवनी वटी, लक्ष्मी विलास रस, गेहूं-ज्वारे का रस, पपीते के पत्तों का रस

बयान
आयुर्वेद में वायरल, चिकिनगुनिया, डेंगू, मलेरिया समेत विभिन्न संक्रामक रोगों का इलाज है। आयुर्वेद की दवाइयों के साइड इफैक्ट भी नहीं हैं।
- डॉ. अभय चौहान, आयुर्वेदाचार्य, पतंजलि चिकित्सालय 
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