रामपुर सपा कद्दावर नेता आजम खां का गढ़ माना जाता है आजम खां पिछले कई चुनावों में अपना सियास दबदबा बरकरार रखने में कामयाब रहे है। आजम खां इस बार फिर मैदान में हैं। उनके मुकाबले में कांग्रेस ने नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां को उतारा है, तो भाजपा के टिकट पर आजम के धुर विरोधी आकाश सक्सेना ताल
चुनाव चाहे लोकसभा का हो विधानसभा का, सियासत में रोमांच ढूंढने वाल की नजर रामपुर पर जरूर होती है। इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि यहां कई सियासी दिग्गज की प्रतिष्ठा दांव पर होती है। रामपुर सपा कद्दावर नेता आजम खां का गढ़ माना जाता है आजम खां पिछले कई चुनावों में अपना सियास दबदबा बरकरार रखने में कामयाब रहे है, 2019 के लोकसभा चुनाव में सांसद बनने के बाद रामपुर शहर विधानसभा सीट पर हुए उप चुनाव में उनकी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा जीत हासिल करने में कामयाब रही थीं।
विज्ञापन
आजम खां इस बार फिर मैदान में हैं। उनके मुकाबले में कांग्रेस ने नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां को उतारा है, तो भाजपा के टिकट पर आजम के धुर विरोधी आकाश सक्सेना ताल ठोक रहे हैं। आकाश सक्सेना पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। सक्सेना ने ही आजम खां, उनके बेटे अब्दुल्ल आजम और पत्नी डॉ. तजीन फात्मा के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज कराए हैं।
बसपा ने इस सीट से सदाकत हुसैन को प्रत्याशी बनाया है, तो आम आदमी पार्टी ने फैसल खां लाला पर दांव लगाय है। चुनावी इतिहास की बात करें तो 1980 के बाद से अब तक सिर्फ 1996 में आजम खां को हार का सामना करना पड़ा था। आजम खां पिछले 23 माह से जेल में हैं। उनके खिलाफ सौ से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। आजम खां के खिलाफ जो मुकदमे दर्ज हुए हैं, उसको मुद्दा बनाकर सपा मतदाताओं की सहानुभूति हासिल करने की कोशिश में है।
विज्ञापन
वहीं, भाजपा की कोशिश है कि आजम विरोधी वोटों का बिखराव नहीं होने पाए। क्योंकि, रामपुर में आजम खां के पक्ष-विपक्ष में लोग बंटे हुए हैं। कांग्रेस के नवेद मियां खुद को विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं। उनकी भी कोशिश आजम के सियासी वर्चस्व को तोड़ने पर है। रामपुर की सियासी जंग में उतरने वाले हर राजनीतिक दल के लिए मुद्दा आजम खां ही है।
रामपुर शहर विधानसभा सीट मुस्लिम बहुल है। शुरुआत में तो इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा, जिसमें नवाब परिवार के सहयोग से ही कांग्रेस को जीत हासिल होती रही। किंतु इसके बाद नवाब परिवार का दबदबा कम होता गया और 1980 में आजम खां पहली बार नगर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। यह चुनाव उन्होंने चौधरी चरण सिंह की जनता पार्टी सेक्युलर से लड़ा था।
इसके बाद लोकदल, जनता दल और जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत हासिल की। 1993 में पहली बार समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़े और जीते, लेकिन, 1996 में उन्हें कांग्रेस के अफरोज अली खां ने हरा दिया। तब आजम खां समाजवादी पार्टी के कोटे से राज्यसभा सदस्य बने थे। इसके बाद से 2002 से लेकर 2017 तक सपा से उन्होंने बतौर विधायक जीत दर्ज की। 2019 में उन्होंने सपा से ही लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके बाद हुए उपचुनाव में उन्होंने पत्नी डॉ. तजीन फात्मा को चुनाव लड़ाया और वह जीत गई।
सपा में ताकतवर मंत्री रहे आजम
वर्ष 2002 और 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में सपा की सरकार बनने के बाद आजम खां दोनों बार सरकार में मंत्री बने। दोनों में उन्हें विशेष अहमियत मिली। यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के बाद सपा सरकार में बड़े फैसलों में आजम खां की सहमति अहम होती थी। जब-जब सपा की सरकार बनी, रामपुर को वीआईपी जिला होने के नाते 24 घंटे बिजली मिली।
समीकरण: मुस्लिम बहुल होने के नाते शहर विधानसभा सीट पर मुस्लिम मतदाताओं का खास असर है। हिंदू मतदाताओं की संख्या कम है। हालांकि, परिसीमन में बदलाव होने के बाद हिंदू मतदाताओं की तादाद में इजाफा हुआ है। ऐसे में समीकरणों में बदलाव हुआ है।
2017 का चुनाव परिणाम
आजम खां, सपा 1,02,100
शिव बहादुर सक्सेना, भाजपा 55,258
डॉ. तनवीर अहमद खान, बसपा 54,248