दिवालिया हुई अमेरिका की आयात कंपनी पियर वन इंपोर्ट ने मुरादाबाद के 36 निर्यातकों के 50 करोड़ रुपये हड़प लिए हैं। इसके बावजूद कंपनी निर्यातकों को झांसा दे रही है कि इस कड़वे अनुभव को भूलकर वह उसे माल सप्लाई करते रहें। अमेरिकी कंपनी की ओर से निर्यातकों को मेल कर कहा गया है कि वह नए कारोबारी आदेशों का समय से भुगतान करेगी। हालांकि निर्यातकों ने कंपनी की इस मांग को ठुकरा दिया है।
पियर वन इंपोर्ट को हैंडीक्राफ्ट के क्षेत्र में अमेरिका की सबसे बड़ी आयात कंपनी के रूप में जाना जाता था। दिल्ली फेयर में जिस अमेरिकी कंपनी के नुमाइंदों को अपने स्टॉल्स पर देखकर निर्यातकों के चेहरे खिल जाते थे, आज वही कंपनी उनकी मायूसी का सबब बनी है। पियर वन इंपोर्ट की मार्केट वैल्यू को देखते हुए भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम (ईसीजीसी) ने इस कंपनी के लिए 150 करोड़ रुपये की लिमिट तय कर रखी थी।
इसमें से 25.5 करोड़ रुपये का कोटा मुरादाबाद के निर्यातकों के लिए था। बाकी 124.5 करोड़ रुपये का कोटा बाकी पूरे देश के निर्यातकों के लिए आरक्षित था। यानी मुरादाबाद से इस कंपनी को होने वाले 25.5 करोड़ रुपये के निर्यात का ईसीजीसी ने बीमा कर रखा था। इंपोर्ट कंपनी के दिवालिया होने या बेईमान होने पर इतनी रकम का भुगतान ईसीजीसी की ओर से निर्यातकों को किया जाएगा। लेकिन निर्यातकों ने तय लिमिट से कहीं अधिक जाकर पियर वन को एक्सपोर्ट किया।
पियर वन ने करीब 15 दिन पहले मेल जारी करके भुगतान करने में हाथ खड़े कर दिए। निर्यातकों को कंपनी ने सलाह दी कि वह अपने क्लेम ईसीजीसी में डाल दें। पियर वन को मुरादाबाद के 36 निर्यातकों ने 50 करोड़ का निर्यात किया था। यह रकम अब डूब गई है। ईसीजीसी क्लेम के रूप में 25.5 करोड़ रुपये का भुगतान तो निर्यातकों को कर देगा लेकिन बाकी बचे 24.5 करोड़ रुपये का नुकसान निर्यातकों को झेलना ही होगा। ईसीजीसी ने अब पियर वन को ब्लैक लिस्ट कर दिया है।