केस एक-
शाहपुर तिगरी निवासी पूनम सिंह ने अपना आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए आवेदन किया। साइबर कैफे वाले ने उन्हें बताया कि उनका कार्ड पहले ही बन चुका है। पूनम का कहना है कि उन्होंने नहीं बनवाया, वह शिकायत लेकर सीएमओ कार्यालय पहुंचीं तो मामले का पता चला। किसी अन्य पूनम देवी नाम की महिला का आयुष्मान कार्ड उनके नाम पर बना हुआ है। उन्होंने कार्ड निरस्त करने के लिए प्रार्थनापत्र दिया है।
केस दो-
लाइनपार निवासी अशोक वर्मा अपने बेटे का हाइड्रोसील का ऑपरेशन कराने निजी अस्पताल गए थे। उन्होंने वहां बेटे का आयुष्मान कार्ड लगाया। अस्पताल प्रबंधन ने चेक किया तो आधार कार्ड में पिता का नाम अशोक वर्मा था, जबकि आयुष्मान कार्ड में अशोक कुमार। उन्होंने बताया कि बेटे का नाम जनगणना सूची में नहीं था। जनसेवा केंद्र पर 1300 रुपये देकर आयुष्मान कार्ड बनवाया था, जोकि काम नहीं आया।
ऐसे पता करें कि आयुष्मान कार्ड असली है या नकली
सबसे पहले जन सेवा केंद्र संचालक से 2011 की जनगणना सूची में अपना नाम चेक कराएं। नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, घर का पता हूबहू होना चाहिए। यदि ऐसा हो तभी आयुष्मान कार्ड बनवाएं। इसके अलावा आधार कार्ड नंबर डालकर भी पात्रता चेक कर सकते हैं। आपका राशन कार्ड होना भी अनिवार्य है।
राशन कार्ड नहीं है और जनगणना सूची में नाम न होने पर जनसेवा केंद्र संचालक कहता है कि कार्ड बन जाएगा लेकिन रुपये लगेंगे तो समझ जाएं कि गड़बड़ है। अन्यथा आपको इलाज के समय अस्पताल में पता चलेगा कि कार्ड किसी और का है।
ये लोग हैं आयुष्मान कार्ड के पात्र
- अंत्योदय राशन कार्ड धारक
- जिनके राशन कार्ड में छह या उससे अधिक यूनिट हैं
- जीविका के लिए दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोग
- जिनके परिवार में कोई दिव्यांग है
- अनुसूचित जाति, जनजाति व आदिवासी नागरिक
- ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में कमजोर आय वर्ग वाले लोग
कार्यालय में लोगों की शिकायत पर उनका आयुष्मान कार्ड निरस्त करने के लिए स्टेट को भेज दिया जाता है। हमारे पास किसी भी पात्र ने जनसेवा केंद्र संचालक के खिलाफ शिकायत नहीं की है। यदि लोग शिकायत करेंगें तो हम ऐसे संचालकों के खिलाफ एफआईआर कराएंगे। - डॉ. नरेंद्र कुमार, डिप्टी सीएमओ