जांच के बाद ही अस्पतालों में भेजी जाती है दवा
लखनऊ से जब दवा जिलों के वेयर हाउस में आती है तो उसे एक माह तक क्वांरटीन रखा जाता है। उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा दवाओं के सैंपल की जांच कराई जाती है। सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद ही दवा सरकारी अस्पतालों में भेजी जाती है।
ऐसे में ड्रग वेयर हाउस से सरकारी अस्पतालों तक पहुंची दवा के सैंपल फेल होने के मामले ने सबको हैरत में डाल दिया है। जिले में प्रभारी मंत्री अनिल कुमार व स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के दौरे से पहले यह रिपोर्ट आई है।
पहले भी फेल हो चुके हैं सरकारी दवाओं के नमूने
बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचाव के लिए लगाए जाने वाले एंटीबायोटिक इंजेक्शन एमोक्सिसिलिन के बैच नंबर एबी 192054 को 16 अक्तूबर 2022 को जांच में फेल पाया गया था। उसके एक लाख इंजेक्शन प्रदेश के सभी जिलों के ड्रग वेयर हाउस से वापस मंगवाए गए थे। इंजेक्शन की सप्लाई एएनजी लाइफ साइंस इंडिया लिमिटेड ने की थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कारपोरेशन लिमिटेड ने बैच नंबर सीएलओ-2101 की सभी क्लोबाजेम टैबलेट 49 जिलों से वापस मंगवाई गईं।