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UP: सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली पेन किलर का सैंपल फेल, मुरादाबाद से लिया था नमूना, बांट दी 75 हजार टैबलेट

Sat, 21 Jun 2025 12:08 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

सरकारी अस्पतालों से मिलने वाली दर्द निवारक दवा सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल पाया गया है। एक माह बाद लखनऊ स्थित लैब से आई रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ। इसमें बताया गया है कि दवा से मरीज को कोई लाभ नहीं होगा।
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जिला अस्पताल मुरादाबाद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सरकारी अस्पतालों से मिलने वाली पेन किलर दवा आईब्रूफेन का सैंपल लखनऊ स्थित लेबोरेटरी की जांच में फेल हो गया। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की टीम ने यह सैंपल 20 मई को लिया था। एक माह बाद आई रिपोर्ट से पहले जिला अस्पताल में आईब्रूफेन की 75000 टैबलेट खप गईं।

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रिपोर्ट के मुताबिक यह दवा खाने से मरीजों को दर्द में कोई फायदा नहीं होगा। रिपोर्ट आने के बाद अब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने रिपोर्ट लखनऊ भेजी है। अब यह स्टॉक वापस मंगाया जाएगा। औषधि निरीक्षक उर्मिला वर्मा ने बताया कि सैंपलिंग के समय दवा के रंग व उसे तोड़कर देखने से ही पता चल गया था कि कुछ गड़बड़ है।

पुष्टि के लिए सैंपल को लखनऊ स्थित लैब भेजा गया था, वहां से रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि दवा खाने से मरीज को दर्द में कोई फायदा नहीं होगा। हालांकि शरीर पर भी इसका हानिकारक प्रभाव नहीं होगा। विभाग का कहना है कि इस मामले में रिपोर्ट के बाद दवा बनाने वाली कंपनी से शासन स्तर पर पूछताछ और कार्रवाई की जाएगी।
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जिला अस्पताल में हर दिन 2500 टैबलेट की खपत होती है। साथ ही आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व 26 अर्बन पीएचसी पर यह दवा दी जाती है। जिला अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट संदीप बडोला का कहना है कि सैंपलिंग जरूर हुई थी लेकिन रिपोर्ट उनके पास अभी नहीं आई है। उन्होंने बताया कि सारी दवा कारपोरेशन की ओर से टेस्ट होने के बाद वेयर हाउस में भेजी जाती है।

जांच के बाद ही अस्पतालों में भेजी जाती है दवा
लखनऊ से जब दवा जिलों के वेयर हाउस में आती है तो उसे एक माह तक क्वांरटीन रखा जाता है। उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा दवाओं के सैंपल की जांच कराई जाती है। सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद ही दवा सरकारी अस्पतालों में भेजी जाती है।

ऐसे में ड्रग वेयर हाउस से सरकारी अस्पतालों तक पहुंची दवा के सैंपल फेल होने के मामले ने सबको हैरत में डाल दिया है। जिले में प्रभारी मंत्री अनिल कुमार व स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के दौरे से पहले यह रिपोर्ट आई है।
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पहले भी फेल हो चुके हैं सरकारी दवाओं के नमूने
बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचाव के लिए लगाए जाने वाले एंटीबायोटिक इंजेक्शन एमोक्सिसिलिन के बैच नंबर एबी 192054 को 16 अक्तूबर 2022 को जांच में फेल पाया गया था। उसके एक लाख इंजेक्शन प्रदेश के सभी जिलों के ड्रग वेयर हाउस से वापस मंगवाए गए थे। इंजेक्शन की सप्लाई एएनजी लाइफ साइंस इंडिया लिमिटेड ने की थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कारपोरेशन लिमिटेड ने बैच नंबर सीएलओ-2101 की सभी क्लोबाजेम टैबलेट 49 जिलों से वापस मंगवाई गईं।
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