कांवड़ मार्गों पर दुकान में संचालकों का नाम अनिवार्य करने के बाद सियासत बढ़ गई है। मुरादाबाद के पूर्व सपा सांसद एसटी हसन ने कहा कि भाजपा प्रदेश का माहौल खराब करना चाहती है। जिसका फायदा उसे विधानसभा उपचुनाव में मिल सके।
कांवड़ यात्रा मार्ग की दुकानों पर मालिकों के नाम और मोबाइल नंबर लिखे जाने वाले फरमान से सियासत गरमा गई है। विपक्षी दल के नेता इसे यूपी में लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली हार की खुन्नस और आने वाले उपचुनाव को लेकर माहौल खराब करने की साजिश बताया है।
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भाजपा नेता सरकार के इस निर्णय की तारीफ कर रहे हैं। पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया पर भी इस आदेश को लेकर बहस छिड़ी है। कई संगठनों ने भी इस फरमान पर विरोध जताया तो कुछ संगठन शासन के इस निर्णय को सही ठहराने में जुटे हैं।
सपा के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने कहा कि भाजपा उत्तर प्रदेश का माहौल खराब करना चाहती है, ताकि विधानसभा उपचुनाव में उसे लाभ मिल सके। हमारे देश के हिंदू मुस्लिम वर्षों से साथ खाते-पीते आ रहे हैं। सरकार उनके बीच नफरत फैलाना चाहती है।
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लेकिन सरकार अपने मकसद में कामयाब नहीं होगी। हिंदू की दुकान पर मुस्लिम काम करते हैं और मुस्लिम की दुकान पर हिंदू काम करते हैं। ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। दो समुदायों के बीच खाई पैदा की जा रही है।
मुरादाबाद के भाजपा से नगर विधायक रितेश गुप्ता ने कहा कि सरकार का ये अच्छा निर्णय है। इसका सभी को स्वागत करना चाहिए। दुकानों पर नाम लिखने से लोगों को पता चल जाएगा कि दुकान किस व्यक्ति की है।
वह वहां से खाने पीने का सामान लेना चाहता हैं तो ले सकता हैं। अगर उसका वहां से सामान खरीदने का मन नहीं है तो नहीं खरीदेगा। सपा के प्रदेश सचिव फिरासत हुसैन गामा ने कहा कि दुकानों के बाहर मालिक का नाम लिखना विशेष समुदाय के प्रति साजिश का हिस्सा है।
कांवड़ मार्ग पर सभी समुदायों के लोग कांवड़ियों का स्वागत करते हैं। लॉक डाउन में सड़कों पर चल रहे लोगों की मदद के लिए किसी ने नाम नहीं पूछा। लोकसभा चुनाव में भाजपा को हार मिली तो अधिकारी जनहित के निर्णय न लेकर भाजपा हित में काम कर रही है।