मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश पुलिस को लंबे अंतराल के बाद घुड़सवार सिपाहियों का नया दल मिला। इन 24 साल के अंतराल में तमाम सिपाही सेवानिवृत्त हो गए, जबकि कुछ उम्रदराज सिपाही पदोन्नत होकर सब इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर बन चुके हैं। जिस कारण विभाग में घुड़सवार सिपाहियों की खासी कमी हो गई थी।
जानकारी के मुताबिक 1998 में डॉ. बीआर आंबेडकर पुलिस अकादमी से ही दस घुड़सवार सिपाहियों का अंतिम दल प्रशिक्षण लेकर पास आउट हुआ था। इसके बाद घुड़सवार सिपाहियों की भर्ती नहीं हुई। पिछले साल भर्ती प्रकिया पूरी होने के बाद प्रशिक्षु घुड़सवार सिपाहियों ने प्रशक्षिण के लिए पुलिस अकादमी में आमद कराई थी। इस लंबे अंतराल के बाद पाठ्यक्रम में भी बदलाव हुआ। नए दौर में घुड़सवार सिपाहियों को आउट डोर और इंडोर ट्रेनिंग की बारीरियां सिखाई गईं। दिसंबर 2021 में सिपाहियों की ट्रेनिंग शुरू हुई थी। 85 घुड़सवार सिपाहियों का प्रशिक्षण 22 मई को ही पूरा हो गया। मंगलवार को घुड़सवार सिपाही भी पास आउट होकर पुलिस विभाग का हिस्सा बन गए।
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मेले और दंगाग्रस्त क्षेत्र में ड्यूटी में होती अहम भूमिका
मुरादाबाद। घुड़सवार सिपाहियों पर जिम्मेदारी होती है कि वह खुद को ट्रेंड करने के साथ ही घोड़ों भी ट्रेंड करते हैं। इसके अलावा घुड़सवारी की प्रतियोगिता में भाग लेकर अपने जनपद के लिए मेडल जीतते हैं। इसके अलावा मेले और दंगाग्रस्त क्षेत्रों में ड्यूटी में अहम भूमिका रहती है।
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देवरिया के सत्यम चुने गए सर्वांग सर्वोत्तम
मुरादाबाद। छह माह के कड़े प्रशिक्षण के दौरान घुड़सवार सिपाहियों के दल में सत्यम सिंह ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया और उन्हें सर्वांग सर्वोत्तम चुना गया। देवरिया के भलुअनी निवासी सत्यम सिंह बीएससी उत्तीर्ण हैं। उन्होंने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान उनके पिता वेदवाहू का देहांत हो गया था। पिता के गम को भुलाते हुए उन्होंने ट्रेनिंग पर ध्यान दिया। जिस कारण वह सर्वांग सर्वोत्तम चुने गए। परिवार में मां सरस्वती देवी हैं। उन्हें वाराणसी में तैनाती मिली है।
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