गणना-प्रपत्र में इन वोटरों ने मतदाता होने से जुड़े साक्ष्य या ब्योरा नहीं दिया था। साक्ष्य देने पर इन मतदाताओं का नाम सूची में शामिल कर लिया जाएगा। अभी नए वोटरों के नाम भी जोड़े जाने हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में नगर सीट पर जीत का अंतर सबसे कम था।
यहां जीत का अंतर सबसे अधिक 56,820 वोट का था
यहां भाजपा प्रत्याशी रितेश गुप्ता ने सपा के हाजी यूसुफ अंसारी को 782 मतों से हराया था। आईएसआर अभियान में इस विधानसभा क्षेत्र के 1,12,338 वोटरों के नाम सूची से बाहर कर दिए गए हैं। इसके अलावा देहात विधानसभा क्षेत्र के 90,937 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। यहां विधानसभा चुनाव में जीत का अंतर सबसे अधिक 56,820 वोट रहा था।
वहीं 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की छह विधानसभा सीटों पर जीत का कुल अंतर 1,71,236 वोटों का था। जबकि एसआईआर अभियान में कटे वोटरों की संख्या 3,87,628 है। जो सभी सीटों पर जीत के कुल अंतर से दोगुने से भी अधिक है। जिसे लेकर राजनीतिक दलों में चिंता है। अगर कटे नाम और नए नाम नहीं जुड़े तो इसका असर 2027 में जिले की विधानसभा सीटों के चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है।
तीन गुना बढ़ गया जीत का अंतर
2022 के चुनाव में कुंदरकी विधानसभा सीट पर सपा ने 43162 वोटों के अंतर जीत दर्ज की थी। लेकिन 2024 में हुए उपचुनाव में जीत का यह अंतर तीन गुना से अधिक हो गया। भाजपा उम्मीदवार रामवीर सिंह ने रिकाॅर्ड 1,44,791 मतों से जीत दर्ज की।
28 फरवरी को होगा मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन
दावे और आपत्तियां 31 दिसंबर से 30 जनवरी तक ली गईं। इन दावों और आपत्तियों का निस्तारण 21 फरवरी तक होगा। इसके बाद 28 फरवरी को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा।