साथ ही इसमें नवाचार और स्वरोजगार प्रशिक्षण केंद्र, कॉफी कक्ष और सहभागिता मंच भी बनाया गया था। निर्यातकों से लेकर दस्तकार तक मानते हैं कि बेसमेंट, भूतल और तृतीय तल तक बने आलीशान शोरूमों में जब कारीगरों के हाथों से बनी विभिन्न प्रकार की वस्तुएं चमकतीं तो उनकी चकाचौंध पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करती।
इससे पीतलनगरी का कारोबार कई गुना बढ़ जाता। योजना के समय बात सिर्फ पीतल के कारोबार की नहीं थी, संभल के हड्डी-सींग से बने प्रोडक्ट हों या फिर अमरोहा, रामपुर, बिजनौर जैसे जिलों की पहचान बन चुके उत्पाद भी यहां से दुनिया में अपनी चमक बिखेरते लेकिन सपने सिर्फ सपने बनकर ही रह गए। दिल्ली नेशनल हाईवे की 30 मीटर चौड़ी रोड पर 12000 वर्ग मीटर में बना यह शीशमहल बसने से पहले ही उजड़ गया।
लीज पर देने व बेचने के प्रयासों में भी फेल एमडीए
करीब साढ़े तीन साल पहले तत्कालीन वीसी यशु रुस्तगी की मौजूदगी में हुई बोर्ड बैठक में सोर्सिंग हब को 30 साल की लीज पर देने का निर्णय हुआ था। शर्त थी कि जो लीज पर लेगा, उसे पहले पांच साल सोर्सिंग हब को विकसित करने के लिए दिए जाएंगे। बाद में हस्तशिल्प विभाग सोर्सिंग हब से होने वाली सालाना आमदनी की आधी धनराशि एमडीए को देगा।
यह धनराशि किसी भी दशा में 5.46 करोड़ रुपये से कम नहीं होनी चाहिए। रुचि न दिखाने पर दो साल बाद ही इसे हस्तशिल्प विभाग को देने का प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया। इसके बाद पिछले साल एमडीए ने इसे बेचने के लिए कीमत का आकलन कराया।
तब कीमत 185 करोड़ रुपये आंकी गई। 13 मार्च 2025 से इसकी नीलामी प्रक्रिया शुरू होनी थी पर बोली लगाने की शर्त (बोली लगाने वाले को 100 करोड़ रुपये पेशगी देनी होगी ) के कारण कोई बोली लगाने नहीं आया।
किस तल पर कितनी दुकानें
भूतल पर 24.20 वर्गमीटर की 48 दुकानें, प्रथम तल पर 39 दुकानें 24.20 वर्गमीटर की, द्वितीय तल पर 41 दुकानें 24.20 वर्गमीटर की, तृतीय तल पर 41 दुकानें 24.20 वर्गमीटर की। इसके अलावा वेयर हाउस (बेसमेंट स्टोर) 114, क्षेत्रफल 12.40 वर्ग मीटर के हैं।
महंगी दुकानें होने के कारण नहीं बिक सकीं
सोर्सिंग हब का उद्देश्य अच्छा था, भवन भी आलीशान है लेकिन अत्यधिक महंगा होने के कारण इनमें कोई दुकान नहीं ले पाया। यदि सोर्सिंग हब की दुकानें लोगों की पहुंच के अंदर रहतीं, तभी इसका फायदा मिल पाता है। अब पैसा भी खराब हुआ और जमीन भी किसी को कोई लाभ भी नहीं मिला। - कमल कौशल, मंडलीय सचिव, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
उद्देश्य से भटक गई परियोजना
केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने मेगा क्लस्टर योजना के तहत पांच करोड़ रुपये दिए थे। एमडीए को सिर्फ जमीन देनी थी, छोटी-छोटी शेडनुमा दुकानें बनानी थीं लेकिन एमडीए ने अत्यधिक लागत से बहुत बड़ी बिल्डिंग बना दी, जो छोटे कारोबारियों, हस्तशिल्पकारों के बस के बाहर हो गईं। कुछ शिकायतों को लेकर ठेकेदार से एमडीए का विवाद हो गया, काम रुक गया। - नोमान अंसारी, अध्यक्ष हैंडीक्राफ्ट डेवलेपमेंट सोसायटी, मुरादाबाद
कीमत अधिक होने के कारण सोर्सिंग हब की नीलामी नहीं हो सकी है। अब इसे प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विकसित करने की योजना है। इसके लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। शीघ्र ही सार्थक परिणाम निकलेंगे।- अनुभव सिंह, उपाध्यक्ष एमडीए