जौहर यूनिवर्सिटी की सड़क और गेट को लेकर दायर किए गए लोक निर्माण विभाग के मुकदमे का निस्तारण अब उप जिलाधिकारी सदर के न्यायालय में ही होगा। इसको लेकर जिला जज के यहां दायर किए गए प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है।
सींगनखेड़ा से लालपुर डैम तक लोक निर्माण विभाग की ओर से सड़क का निर्माण किया गया है। 11.6 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण पर 17.16 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इसमें से साढ़े तीन किलोमीटर सड़क जौहर विश्वविद्यालय के अंदर से होकर जाती है। इसी सड़क पर जौहर विश्वविद्यालय की ओर से गेट बना लिया गया है। इस गेट की वजह से गांव के लोगों का मार्ग बंद हो गया है, जिस पर क्षेत्र के लोगों ने मार्ग खुलवाने की मांग की थी।
इसको लेकर लोक निर्माण विभाग की ओर से यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया था। इसमें मार्ग से निर्माण हटाने को कहा गया था, लेकिन जौहर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने हाईकोर्ट की शरण ले ली थी। हाईकोर्ट की ओर से जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर कोई राहत न देते हुए लोक निर्माण विभाग से पूछा गया था कि यूनिवर्सिटी को नोटिस किए एक्ट के तहत जारी किया गया है। इस पर लोक निर्माण विभाग ने अब उप जिलाधिकारी सदर के न्यायालय में वाद दायर कर दिया था। यह वाद पीपी एक्ट के तहत दायर किया गया था।
एसडीएम के न्यायालय से भी यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा गया था, लेकिन कोई जवाब देने के बजाय जिला जज के यहां प्रार्थना पत्र दिया था, जिसमें वाद की सुनवाई के लिए किसी दूसरी कोर्ट में मामले को ट्रांसफर करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए इस प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है।
प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव अग्रवाल ने बताया कि कोर्ट ने उनके प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया है। अब पूरे मामले का निस्तारण उप जिलाधिकारी सदर के न्यायालय में ही होगा। जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह ने भी इस मामले की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि इस मामले की सुनवाई एसडीएम सदर के न्यायालय में ही होगा।