उसे कोर्ट में पेश होना था, लेकिन वह बिना कोर्ट में पेश हुए ही वापस लौट जाता था। इस दौरान उसने मुरादाबाद में कुछ युवाओं से संपर्क किया और आतंकी संगठन में शामिल करने के लिए बरगलाया, लेकिन बाद में वह किसी को शामिल नहीं करा पाया।
1999 में वह पीओके में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी कैंप में पहुंच गया था। करीब एक साल तक उसने आतंकी ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग लेने के बाद वह वापस जम्मू कश्मीर आया और इसके बाद 2000 में फिर से मुरादाबाद आ गया था। फिर यहां आतंक की नर्सरी तैयार करनी शुरू कर दी।