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हिजबुल आतंकी उल्फत हुसैन की कहानी: जेल से छूटकर कीं तीन शादियां... पहचान छिपाकर इस जिले में चला रहा था आरामशीन

Sun, 09 Mar 2025 11:04 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

आतंकी उल्फत हुसैन ने 2008 में चार जमानतदारों से 50-50 हजार का बॉन्ड भरवाकर जमानत ले ली थी। इसके बाद उसे तारीख पर हाजिर होना था, लेकिन वह नहीं आया। उसने तीन शादियां भी कीं। उसके पांच बच्चे भी हैं।
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Hizbul terrorist Ulfat Hussain - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जेल से छूटने के बाद हिजबुल आतंकी उल्फत हुसैन ने अपना नाम बदल लिया और जम्मू कश्मीर में ही आरा मशीन चलाने लगा। 17 साल में उसने तीन शादियां की हैं और पांच बच्चे भी हैं। एसटीएफ लोकल खुफिया एजेंसी की मदद से आरोपी तक पहुंची और उसे दबोच लिया।

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बताया जा रहा है कि आतंकी उल्फत हुसैन ने 2008 में चार जमानतदारों से 50-50 हजार का बॉन्ड भरवाकर जमानत ले ली थी। इसके बाद उसे तारीख पर हाजिर होना था, लेकिन वह नहीं आया। 

कई बार कोर्ट से समन और वारंट जारी होने के बाद भी हाजिर नहीं हुआ। इस दौरान उसने नए नाम हुसैन मलिक से अपना पहचान पत्र बनवा लिया और गांव में रहने लगा। पिता से मिली छह बीघा जमीन पर उसने खेतीबाड़ी की। 
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साथ ही आरा मशीन शुरू कर दी। उसने तीन शादियां भी कीं। उसके पांच बच्चे भी हैं। अब एटीएस उसकी पत्नियों और बच्चों से भी पूछताछ करेगी। एसपी सिटी ने बताया कि एटीएस और कटघर पुलिस के हत्थे चढ़ा हिजबुल का आतंकी उल्फत हुसैन जेल से रिहा होने के बाद दो बार मुरादाबाद आया। 

उसे कोर्ट में पेश होना था, लेकिन वह बिना कोर्ट में पेश हुए ही वापस लौट जाता था। इस दौरान उसने मुरादाबाद में कुछ युवाओं से संपर्क किया और आतंकी संगठन में शामिल करने के लिए बरगलाया, लेकिन बाद में वह किसी को शामिल नहीं करा पाया।

पिता को चुनाव लड़ाने पहुंचा जम्मू कश्मीर, तभी आतंकियों के संपर्क में आया
एसपी सिटी ने बताया कि जम्मू कश्मीर में 1998 में सरपंच के चुनाव हुए थे। अल्फत हुसैन के पिता भी चुनाव लड़ रहे थे। इसकी जानकारी मिलने पर वह अपने गांव चला गया और अपने पिता को चुनाव लड़ाया। इस दौरान पीओके के लोग उसके पिता से मिलने आते थे। इसी दौरान उन्होंने अल्फत हुसैन से संपर्क किया।
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1999 में वह पीओके में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी कैंप में पहुंच गया था। करीब एक साल तक उसने आतंकी ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग लेने के बाद वह वापस जम्मू कश्मीर आया और इसके बाद 2000 में फिर से मुरादाबाद आ गया था। फिर यहां आतंक की नर्सरी तैयार करनी शुरू कर दी।

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