मुरादाबाद। दो साल बाद रामगंगा नदी में शहर का गंदा पानी गिरना पूरी तरह बंद हो जाएगा। 409 करोड़ रुपये की लागत से शहर में दो स्थानाें पर 80 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता के दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किए जाएंगे। बुद्धि विहार में 15 एमएलडी और चंदौसी रोड पर 65 एमएलडी क्षमता के एसटीपी बनेंगे। साथ ही पांच प्रमुख नालियों को इंटरसेप्ट कर डायवर्ट किया जाएगा। एसटीपी निर्माण के लिए जल निगम अगले महीने टेंडर प्रक्रिया पूरी कर लेगा। 2027 तक कार्य पूर्ण हो जाएंगे।
शहर की जीवनरेखा कही जाने वाली रामगंगा नदी को गंदे नालों के पानी से बचाने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एमएमसीजी) के तहत बड़ा कदम उठाया गया है। अगले दो वर्षों में रामगंगा में शहर का गंदा पानी गिरने से रोकने के लिए एसटीपी प्लांट बनाए जाएंगे। प्लांट शुरू होने के बाद नया मुरादाबाद और करुला क्षेत्र के लगभग तीन लाख घरों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे रामगंगा में नहीं गिरेगा। गंदा पानी पहले एसटीपी में शोधित होगा और फिर नदी में छोड़ा जाएगा। इससे न केवल रामगंगा की सेहत सुधरेगी, बल्कि जल प्रदूषण में भी भारी कमी आएगी।
जल निगम के अधिकारियों के मुताबिक नगर निगम के सहयोग आवास विकास बुद्धि बिहार क्षेत्र में और चंदौसी रोड पर एसटीपी निर्माण के लिए जगह चिह्नित कर ली गई है। बुद्धि विहार क्षेत्र में स्थापित किए जाने वाले एसटीपी से दिल्ली रोड से जुड़ी आबादी के नाली-नालों के पानी को शोधित कर रामगंगा तक पहुंचाया जाएगा। वहीं चंदौसी रोड पर बनाए जाने वाले एसटीपी में करूला व उसके आसपास की आबादी के घरों से निकला पानी और बारिश के दौरान नाली, नालों से होकर रामगंगा में पहुंचने वाला गंदा पानी शोधित होगा। जल निगम अगले महीने दोनों प्रोजेक्ट्स की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर लेगा।
00
15 साल के लिए खत्म हो जाएगी समस्या
जल निगम अधिकारियों के मुताबिक शहर में इन दोनों एसटीपी का काम पूरा हो जाने के बाद अगले 15 साल तक के लिए शहर के गंदे पानी को शोधित करने के लिए कोई नया एसटीपी नहीं लगाना पड़ेगा। नगर निगम और जल निगम का यह संयुक्त प्रयास मुरादाबाद को स्वच्छ और टिकाऊ शहरों की श्रेणी में लाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
000
यह होता है एसटीपी का काम
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) वह संयंत्र होता है, जहां घरेलू और औद्योगिक गंदे पानी को फिल्टर करके साफ किया जाता है ताकि वह दोबारा इस्तेमाल हो सके या सुरक्षित रूप से नदी में छोड़ा जा सके। शोधित पानी नदी में छोड़ने से नदी में रहने वाले जीव-जंतुओं को भी कोई नुकसा नहीं पहुंचता है।
000
यह होंगे लाभ
- रामगंगा नदी स्वच्छ होगी।
- गंदे पानी के कारण होने वाली बीमारियों में कमी आएगी।
- स्वच्छ पर्यावरण और स्वच्छता मिशन को बढ़ावा मिलेगा।
- स्थानीय निवासियों को बेहतर जीवन गुणवत्ता मिलेगी।
000
एक एसटीपी कर रहा काम, दूसरा निर्माणाधीन
शहर में अभी सिर्फ 58 एमएलडी का एक एसटीपी काम कर रहा है। यह रामपुर रोड पर हनुमान मूर्ति तिराहे के पास स्थित है। इसके अलावा चक्कर की मिलक क्षेत्र में 25 एमएलडी क्षमता का एक एसटीपी निर्माणाधीन है। इसका करीब 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। अगले दो माह में इसका निर्माण पूरा होने की उम्मीद है।
000
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत शहर में दो नए एसटीपी स्थापित किए जाएंगे। शासन से इसके लिए धनराशि मंजूर हो चुकी है। मई में टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। उसके बाद नाली को नालों से और नालों को एसटीपी से कनेक्ट करने का काम भी शुरू कर दिया जाएगा। दो साल में निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। इसके बाद शहर में चार एसटीपी हो जाएंगे। इससे अगले 15 साल तक रामगंगा में गंदा पानी जाने की समस्या खत्म हो जाएगी। - फराहीम अहमद, अधिशासी अभियंता, जल निगम (ग्रामीण)