8 साल पुराने मारपीट के मामले में अदालत ने दो सगे भाइयों मोहम्मद अली और असगर अली को दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल की सजा और साढ़े छह हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इस घटना में शामिल अन्य पांच आरोपियों की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो चुकी है। अदालत ने भगतपुर के तत्कालीन दरोगा महिपाल सिंह को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
18 साल पुराने मारपीट के मामले में दो सगे भाइयों को दोषी करार देते हुए अदालत ने पांच-पांच साल के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर साढ़े छह हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इसी मामले में पांच आरोपियों की मुकदमे के दौरान माैत हो चुकी है, जबकि एक आरोपी को बरी कर दिया गया।
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भगतपुर में 22 जुलाई 1996 को सीतापुर की रहने वाली रोशन जहां ने मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें बताया कि उसके घर भगतपुर थाने के दरोगा महिपाल सिंह, सिपाही झूमर सिंह और गांव के अहमद अली, असगर अली के साथ तीन अज्ञात लोग आए और गाली-गलौज की और विरोध पर मारपीट की।
इस मामले में पुलिस के आलाधिकारियों के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या दस योगेंद्र चौहान की अदालत में की गई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दिनेश कुमार कश्यप ने बताया कि इस मामले आरोपी बनाए गए पुलिसकर्मी ईश्वरदत्त, महाराज सिंह, शैलेश कुमार, झूमर सिंह व अहमद अली की मुकदमे के दौरान माैत हो चुकी है।
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अदालत ने तत्कालीन उपनिरीक्षक थाना भगतपुर महिपाल सिंह के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं होने पर मुकदमे से बरी कर दिया। इस घटना में शामिल मोहम्मद अली और उसके भाई असगर अली को पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर दोषी करार देते हुए पांच साल के कारावास की सजा सुनाई।