मुरादाबाद। एक ओर गाजियाबाद से मुरादाबाद होते हुए सीतापुर तक फोर लाइन रेल परियोजना को रेलवे के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है। दूसरी ओर इसी रेल मंडल में मुरादाबाद से चंदौसी होते हुए बरेली तक ट्रेनें अब भी सिंगल लाइन पर दौड़ रही हैं। यहां दोहरीकरण भी मयस्सर नहीं है। जबकि करीब 115 किमी के इस रेलखंड के लिए पिंक बुक में हर बार बजट आता है लेकिन रेलवे बोर्ड की अनुमति न मिलने से काम शुरू नहीं हो पाया है।
करीब 115 किलोमीटर लंबे मुरादाबाद-चंदौसी-बरेली रेलखंड पर फिलहाल केवल एक लाइन है। इसी ट्रैक से होकर लिंक एक्सप्रेस, सद्भावना एक्सप्रेस समेत 20 यात्री ट्रेनें और करीब इतनी ही मालगाड़ियों का संचालन होता है। ट्रेनों की संख्या बढ़ने के साथ यह रेलखंड क्षमता से अधिक बोझ झेल रहा है। क्रॉसिंग के लिए ट्रेनों को कई बार स्टेशनों पर रोकना पड़ता है, जिससे देरी आम बात बन चुकी है। बृहस्पतिवार को भी ट्रेनों के लेट होने पर यात्रियों ने एक्स पर शिकायत पोस्ट की। रेलवे का जवाब था कि आपकी ट्रेन सिंगल लाइन सेक्शन पर चल रही है। एक गाड़ी पास होने के बाद ही दूसरी ट्रेन आगे बढ़ सकेगी। इसका असर यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन पर भी पड़ रहा है।
विभागीय जानकारों का कहना है कि जब तक मुरादाबाद-चंदौसी-बरेली रेलखंड का दोहरीकरण नहीं होगा, तब तक फोर लाइन परियोजना का पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा। रेलवे विकास निगम इस रेलखंड के दोहरीकरण का सर्वे पूरा कर चुका है। पिलर लगाने सहित प्रारंभिक तैयारियां भी हो चुकी हैं, लेकिन निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है।
दोहरीकरण होने पर ट्रेनों की क्रॉसिंग की मजबूरी खत्म होगी, समयपालन सुधरेगा और मालगाड़ियों की आवाजाही भी तेज होगी। इससे बरेली, चंदौसी, अलीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की रेल कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलेगी। सीनियर डीसीएम महेश यादव का कहना है कि दोहरीकरण का कार्य कब शुरू होगा, इस विषय में रेल मुख्यालय से जानकारी लेनी होगी। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।