मुरादाबाद। कोरोना काल में जिले के प्राइवेट स्कूलों ने बच्चों से फीस तो ले ली लेकिन कोर्ट के आदेश के मुताबिक फीस की 15 फीसदी रकम तीन साल बाद भी वापस नहीं कर रहे हैं। इन स्कूलों पर जिले के करीब 4000 बच्चों की फीस अटकी है। अभिभावकों ने बताया कि फीस वापस करने के लिए स्कूलों में कई बार शिकायत की गई लेकिन कोई भी स्कूल संचालन सुनने को तैयार नहीं है।
जिले में सीबीएसई और आईसीएससी के 60 से अधिक स्कूल हैं। मुरादाबाद पैरेंट्स ऑफ ऑल स्कूल के अनुसार छात्र-छात्राओं से कोरोना काल के दौरान सत्र 2020-2021 में ली गई फीस का 15 फीसदी रकम सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों को वापस करना था। तीन साल बीत गए लेकिन स्कूलों ने अभी तक 4000 छात्र-छात्राओं की तीन से चार करोड़ रुपये की रकम नहीं लौटाई। पैरेंट्स ऑफ ऑल स्कूल के पदाधिकारियों ने बताया कि कोविड की पहली और दूसरी लहर का स्कूलों की पढ़ाई पर काफी असर पड़ा। इसलिए सत्र 2020-2021 में स्कूल बंद रहे और पढ़ाई ऑनलाइन हुई। कोविड से प्रभावित होने के कारण कई अभिभावकों के लिए फीस भरना भी मुश्किल हो गया था। मुरादाबाद पैरेंट्स ऑफ ऑल स्कूल के अध्यक्ष अनुज गुप्ता ने बताया कि हाई कोर्ट ने कहा कि ट्यूशन फीस से इतर स्कूलों के खर्चे में कमी आई है। ऐसे में सत्र 2020-2021 के दौरान वसूली गई फीस का 15 प्रतिशत छात्रों को वापस किया जाए। कोर्ट ने ये आदेश जनवरी 2023 में दिया था। इसके बाद फरवरी 2023 में यूपी सरकार ने स्कूलों को छात्र-छात्राओं की फीस वापस करने के लिए आदेशित किया लेकिन अभी भी स्कूलों ने फीस वापस नहीं की गई है।