मुरादाबाद। सातवीं मुहर्रम पर मंगलवार को लाकड़ीवालान में दिनभर मजलिसों, नौहाख्वानी, मातम और अलम के जुलूस का सिलसिला जारी रहा। सुबह अली यावर नकवी के आवास पर आयोजित मजलिस में शबी हैदर ने मरसियाख्वानी और हैदर साहब ने सोजख्वानी की। इसके बाद मौलाना सैय्यद नकी अब्बास रिजवी ने खिताब करते हुए कर्बला के शहीदों, विशेष रूप से हजरत कासिम की शहादत का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने अल्लाह की राह में अपने कमसिन भतीजे हजरत कासिम से लेकर छह माह के मासूम अली असगर तक की कुर्बानी पेश कर सब्र और शुक्र का बेमिसाल संदेश दिया। शहादत का बयान सुनकर अजादार गमगीन हो उठे और हाय हुसैना की सदाओं के बीच मातम किया। शमीम अख्तर ने नौहाख्वानी की।
मजलिस में डॉ. तनवीर, डॉ. सिब्ते नबी, जावेद यावर, शान हैदर, सुहैल अहमद रिजवी, आसिम यावर, कायम हसनैन, मोहम्मद अब्बास, सुल्तान हैदर, हुसैन हैदर आदि अजादार मौजूद रहे। इसके साथ ही शाम में चौमुखा पुल स्थित इमामबाड़े में दूसरी मजलिस हुई, जिसे मौलाना कौसर मुजतबा ने संबोधित किया। इसके बाद हकीम फरजंद अली के इमामबाड़े में तीसरी मजलिस का आयोजन हुआ, जिसमें मौलाना हसन मुजतबा ने कर्बला पर रोशनी डाली।
तीनों मजलिसों के बाद अली हैदर जानी के आवास से अलम का जुलूस निकाला गया। जुलूस में पीरजादा मोहल्ले और थाना नागफनी क्षेत्र से आए अलम भी शामिल हुए। नौहाख्वानी और मातम के बीच जुलूस अपने निर्धारित मार्गों से होता हुआ नियारियां स्थित बन्नो बी के इमामबाड़े पर संपन्न हुआ। जुलूस में अंजुमन अकबरी कुंदरकी, अंजुमन जीनत-ए-अजा सहित बड़ी संख्या में अजादार शामिल रहे।