पुलिसकर्मियों को दी गई ट्रेनिंग
जनपद में गोपनीय तरीके से घुसपैठियों की तलाश की जा रही है। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के लोगों के बीच काफी समानता होती है। इनका रहन-सहन और खानपान एक जैसा होता है। भाषा भी लगभग एक जैसी होती है। पश्चिम बंगाल के लोगों के बीच घुसपैठिए आसानी से छिपे रहते हैं।
शहर में कई मोहल्लों में पश्चिम बंगाल के लोग रहते और काम धंधा करते हैं। इनके बीच घुसपैठियों को तलाशना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। इस काम के लिए जिन पुलिसकर्मियों को लगाया गया है। अफसरों ने पहले उन्हें ट्रेनिंग दी है। ट्रेनिंग में उन्हें बताया गया है कि उन्हें किस तरह इन लोगों की पहचान करनी है।
दो साल पहले भी पकड़े गए थे घुसपैठिए
दो साल पहले भी मुरादाबाद में बांग्लोदशी घुसपैठियों को पकड़ा गया था। महिला 17 साल पहले अपने बच्चों व भाई के साथ बांग्लादेश से भारत आई थी। इसके बाद वह मेरठ की मीट फैक्टरी में काम कर रही थी। उसकी बेटियां भी यहीं काम करती थीं।
पुलिस और खुफिया एजेंसियों से बचने के लिए आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज बनवा रखे थे। परिवार मूल रूप से म्यांमार का निवासी था। आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। महिला अपनी तीन बेटियों, एक बेटे अनस को लेकर भाई बटु रहमान के साथ भारत आ गई थी।
इसके अलावा म्यांमार के रहने वाले एक रोहिंग्या ने भी खुद को मुरादाबाद का मूल निवासी बताकर पासपोर्ट बनवा लिया था। तेलंगाना के राचकोंडा जनपद में बालापुर थाने में तैनात दरोगा बी. श्रीकांत ने कांठ थाने में केस दर्ज कराया था।
जिसमें उन्होंने बताया था कि म्यांमार के रहने वाले रोहिंग्या ने अपनी पहचान मोहम्मद फारूक उर्फ मोहम्मद इस्माइल (29) पुत्र नुरुल हक उर्फ अहमद नूर के रूप में पासपोर्ट में दर्ज कराई थी। उसने खुद को मुरादाबाद के कांठ थाना क्षेत्र में अकबरपुर चंदेरी का निवासी दर्शाया था। वह विदेश भी घूमकर आया था।