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Moradabad News: काली माता मंदिर के चढ़ावा का नहीं था हिसाब, अब खाते मेें होे रहा जमा

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मुरादाबाद। राम मंदिर में चढ़ावे में हेरफेर का मामला सामने आने के बाद शहर के लालबाग काली माता मंदिर की नई और पुरानी व्यवस्था चर्चाओं में है। दो महीने पहले तक मंदिर के चढ़ावे की रकम का हिसाब किताब नहीं था। लेकिन अब चढ़ावे की रकम हर बैंक में जमा किया जा रहा। साथ ही कर्मचारियों का भुगतान भी चेक या खाते में किया जाता है।
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लोगों की शिकायतों की जांच के बाद नाै अप्रैल को महंत सज्जन गिरि और महंत राम गिरि का स्थानांतरण कर महाकाल गिरि और हितेश्वर गिरि को महंत बनाया गया था। इसके बाद जब जूना अखाड़े के पदाधिकारियों ने मंदिर की संपत्ति और चढ़ावे का हिसाब किताब करवाया गया तो चौंकाने वाली बात सामने आई। पता चला कि आज तक मंदिर के दान और चढ़ावे की रकम को जमा करवाने के लिए कोई बैंक खाता ही नहीं खुला था। सारा दान महंतों के पास रखे जाते थे। इसके अलावा मंदिर में कोई भी बहुमूल्य धातु के जेवर और सामान नहीं मिले। जो भी मिला वह सब आर्टिफिशल था।
यही नहीं चढ़ावा आने के बाद भी बिजली का बिल जमा नहीं किया जाता था। वहीं दोनों मंदिरों की दाने पेटिका खोली गई तो सिर्फ 1.14 लाख रुपये का चढ़ावा मिला। जबकि नवरात्रि के ठीक बाद दाने पेटिका खोली गई थी। ऐसे में चढ़ावा की रकम अधिक होनी चाहिए थी। इसके अलावा मंदिर के नाम जमीन, जायदाद ओर अन्य चीजों का भी आजतक कोई पता नहीं लग पाया है।
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श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के प्रवक्ता महंत नारायण गिरि के मुताबिक पहले मंदिर के चढ़ावे का कोई हिसाब किताब नहीं था। महंत बदलने के बाद व्यवस्था भी बदली है। मंदिर के दो खाते खुलवाए गए हैं। अब चढ़ावे की रकम बैंक में जमा किया जाता है। कर्मचारियों का भुगतान या दूसरे लेने-देन भी खाते से ही किए जाते हैं। इसमें अखाड़े से जुड़े काली माता मंदिर, प्राचीन सिद्ध पीठ श्री नाै देवी काली माता मंदिर और रामगंगा मंदिर पर बिजली बिल का करीब 42 लाख रुपये बकाया भी शामिल था। सब्सिडी मिलने पर 29.04 लाख रुपये जमा किए गए।
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हर 15 दिन पर खुलती है दान पेटिका
- श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के प्रवक्ता महंत नारायण गिरि ने बताया कि हर 15 दिन पर मंदिर से जुड़े लोगों के सामने दान पेटिका खोली जाती है। इसमें औसतन 90 हजार से एक लाख रुपये चढ़ावा निकलता है।
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दान में मिले जेवरों का नहीं दिया लेखा जोखा
- श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के प्रवक्ता महंत नारायण गिरि ने बताया कि पुराने महंतों ने मंदिर से जुड़ा कोई ब्योरा नहीं दिया था। दान में मिले जेवरों का लेखा जोखा नहीं रखा गया है। उनका आरोप है कि मंदिर में कोई जेवर नहीं मिले। जबकि कई लोगोें ने चढ़ावे में जेवर दिए थे।
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