मुरादाबाद। स्वास्थ्य विभाग में वित्तीय अनियमित्ता का मामला सामने आया है। विभाग ने 14.95 स्वीकृत बजट की जगह 40.14 लाख रुपये खर्च कर दिए, जो स्वीकृत बजट से दोगुने से अधिक (25.19 लाख) धनराशि है। ये धनराशि अलग-अलग योजनाओं के 52 मदों में खर्च की गई है। इसमें 44 मद तो ऐसे हैं, जिनके लिए कोई धनराशि स्वीकृत नहीं थी। स्वीकृत बजट से अधिक धनराशि खर्च को वित्त नियंत्रक ने अनियमित्ता मानते हुए सीएमओ से जवाब तलब किया है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के तहत वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए करीब 70 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। 7.91 करोड़ की धनराशि बच गई थी। इसे वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए कमिटेड बजट के लिए (मदवार स्वीकृत बजट सीमा तक) व्यय करने के निर्देश दिए गए थे। स्वास्थ्य विभाग ने इस धनराशि में से 40.14 लाख रुपये खर्च कर दिए। यह रुपये 52 मदों में खर्च किए गए, जबकि सिर्फ नौ मदों के लिए 14.95 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे।
मजे की बात यह है कि इन 52 मदों में 43 के लिए कोई कमिटेड बजट ही नहीं था। इस खर्च के ब्योरे को मार्च 2021 में शासन को भेजा गया। समीक्षा में वित्त नियंत्रक एमके भट्ट ने विभिन्न मदों में 25.19 लाख की धनराशि, कमिटेड बजट की सीमा से अधिक व्यय को अनियमित्ता माना है। उन्होंने सीएमओ को पत्र जारी कर कारण और औचित्य पूछा है कि किन परिस्थितियों में कमिटेड बजट स्वीकृत न होने के बावजूद धनराशि व्यय की गई।
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- योजनाओं में जरूरत के हिसाब से धनराशि खर्च की जाती है। इसकी स्वीकृति बाद में ले ली जाती है। कोविड में भी जरूरत को देखते हुए धनराशि खर्च की गई थी, जिसकी बाद में स्वीकृति मिल गई थी। सभी भुगतान भी हो गए। अकाउंटेंट से खर्च का ब्योरा मांगा गया है। जल्द ही इसका जवाब भेज दिया जाएगा। - डा. एमसी गर्ग, सीएमओ
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किस मद में कितना किया गया खर्च
मद स्वीकृत धनराशि खर्च
टीबी के मरीजों की सर्वे प्रोत्साहन राशि- 00 3.53 लाख
निश्चय पोषण योजना- 00 3.36 लाख
महिला नसबंदी- 00 1.86 लाख
नसबंदी के लिए टीम प्रोवाइटर सर्विस- 00 1.69 लाख
ब्लॉक स्तर पर गाड़ियों का खर्च- 3.99 लाख 5.60 लाख
हेल्थ वेलनेस इंसेंटिव- 3.84 लाख 5.40 लाख
एमओएस आयुष- 0.12 लाख 1.29 लाख
तंबाकू नियंत्रण मेडिसिन- 1.97 लाख 2.86 लाख
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पांच मदों में एक-एक हजार रुपये अधिक खर्च
पांच मद ऐसे हैं जिनमें विभाग ने एक-एक हजार रुपये अधिक खर्च किए हैं। इसमें चार मद में एक हजार रुपये भी खर्च करने की स्वीकृति नहीं थी, फिर भी धनराशि खर्च की गई।