मुरादाबाद। मोहर्रम की तीसरी तारीख को विभिन्न मातमी अंजुमनों ने इमामबाड़ों में नौहा और मातम का पुरसा पेश किया। मजलिस में उलमा ने अपनी तकरीर में इमाम हुसैन पर कर्बला में हुए जुल्म और ज्यादतियों का जिक्र किया। इस दौरान माहौला गमगीन हो गया और अजादारों के खूब आंसू बहाए। इस दौरान या हुसैन की सदाएं भी बुलंद होती रही।
रविवार को पहली मजलिस लाकड़ीवालान में मरहूम अली यावर नकवी के मकान पर हुई। मौलाना हसन मुज्तबा ने अपनी तकरीर में कर्बला में इमाम हुसैन के बचपन के दोस्त रहे जनाब मुस्लिम की शहादत को बयान किया। जनाब मुस्लिम ने बताया है कि दोस्त का हक क्या होता है और उसकी जिम्मेदारियां क्या होती हैं। इससे पहले हाजी शबी हैदर ने मर्सिया ख्वानी की।
दूसरी मजलिस चौमखपुल में स्थित इमामबाड़ा मीर सआदत अली में हुई, जिसे अली मोहम्मद ने खिताब किया। लाकड़ीवालान के इमामबाड़ा हकीम फरजंद अली में तीसरी मजलिस हुई।
नवाबपुरा में स्थित इमामबाड़ा अबू तालिब में मौलाना अली हैदर नूरी और इमामबाड़ा कुली अली खां में मौलाना शाहवार हुसैन ने अपनी तकरीर में इमाम हुसैन के करबला पहुंचने, जनाब मुस्लिम की शहादत और कर्बला में दरिया के किनारे खेमे हटाने की रिवायत बयान किए।
उन्होंने बताया इमाम हुसैन पर किस-किस तरह के जुल्म ढाए गए, जिसे सुनकर अकीदतमंदों ने खूब आंसू बहाए। मजलिस के बाद अंजुमन के सदस्यों ने नौहाख्वानी की। इस मौके पर बड़ी संख्या में काले लिबास में अजादार मौजूद रहे।