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Moradabad News: आधी आबादी की सेहत का हाल... हर 10 मरीजों में से छह महिलाएं

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मुरादाबाद। जिला अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों महिलाओं की संख्या पुरुषों से लगातार अधिक बनी हुई है। हर दिन औसतन 1500 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें 900 से अधिक महिलाएं और करीब 600 पुरुष शामिल हैं। यानी हर 10 मरीजों में से छह महिलाएं हैं। मेडिसिन विभाग से लेकर बाल रोग और मानसिक रोग विभाग तक महिलाओं और बच्चियों की संख्या ज्यादा दर्ज की जा रही है।
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सबसे अधिक महिलाएं मौसमी बुखार, सर्दी-जुकाम, वायरल संक्रमण, डायबिटीज, थायराइड, हाई ब्लड प्रेशर और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं के इलाज के लिए पहुंच रही हैं। जिला अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि महिलाओं में बीमारी बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। डॉक्टरों के अनुसार, महिलाओं में एनीमिया, थायराइड, हार्मोनल बदलाव, गर्भावस्था के बाद स्वास्थ्य की अनदेखी, पोषण की कमी, तनाव और मधुमेह जैसी गैर संचारी बीमारियां अधिक पाई जाती हैं। कई महिलाएं लंबे समय तक बीमारी को नजरअंदाज करती हैं और दिक्कत बढ़ने पर अस्पताल पहुंचती हैं। चिकित्सकों का कहना है कि नियमित जांच, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और समय पर इलाज से इन बीमारियों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। फिजिशियन डॉ. आशीष सिंह का कहना है कि कई शोध भी बताते हैं कि महिलाओं में थायराइड, एनीमिया और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं पुरुषों की तुलना में अधिक पाई जाती हैं। पिछले सप्ताह की ओपीडी

दिन महिला मरीज पुरुष मरीज कुल
सोमवार 1035 810 1845
मंगलवार 910 595 1505
बुधवार 905 632 1537
गुरुवार 920 605 1525
शुक्रवार 891 590 1481
शनिवार 875 581 1456

एनसीडी रिपोर्ट में भी महिलाएं आगे
गैर संचारी रोग (एनसीडी) की रिपोर्ट ने भी साफ किया है कि पूरे वित्तीय वर्ष के आंकड़ों तक हर प्रमुख सूचकांक में बीमार महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक 87,892 लोगों की जांच में 54,066 महिलाएं और 33,826 पुरुष शामिल हैं। डायबिटीज के मामले में सालभर में 4,249 महिलाएं बीमार मिलीं, जबकि पुरुषों की संख्या 3,154 है। 3,323 महिलाएं बीपी से जूझती पाई गईं, जबकि 2,412 पुरुषों को हाई ब्लड प्रेशर के लिए दवा लेने की सलाह दी गई।
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आमतौर पर यह देखा जाता है कि ओपीडी में महिलाओं की संख्या ज्यादा है। यदि महिलाएं नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं और बीमारियों के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें तो गंभीर बीमारियों का खतरा काफी कम किया जा सकता है।
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डॉ. राजेंद्र कुमार, चिकित्सा अधीक्षक
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