कांठ (मुरादाबाद)। खेत पर काम कर रहे किसान पर हमला कर लहूलुहान करने वाला तेंदुआ आखिरकार शिकंजे में आ ही गया। खेत से निकलकर पुलिया के नीचे छिपे तेंदुए को वन विभाग की टीम ने पकड़कर पिंजरे में कैद कर लिया। मेडिकल परीक्षण कराने के बाद तेंदुए को बिजनाैर के साहनपुर रेंज के जंगल में छोड़ दिया गया।
कांठ तहसील व छजलैट थाना क्षेत्र के नक्संदाबाद निवासी किसान दलवीर सिंह (37) शुक्रवार सुबह खेत में ईंख की खोदाई कर रहा था। बराबर में स्थित सुरेश सिंह के बाजरे के खेत से अचानक निकले तेंदुए ने दलवीर पर हमला कर उसे गंभीर घायल कर दिया था। अन्य किसानों के ललकारने पर तेंदुआ दलवीर को छोड़कर फिर से खेत में घुस गया था। घायल को इलाज के लिए मुरादाबाद के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सूचना छजलैट पुलिस और वन विभाग की मुरादाबाद व बिजनौर टीम भी मौके पर पहुंच गई थी। टीम ने तेंदुए को पकड़ने के लिए खेत के बाद पिंजरा लगाया था लेकिन शुक्रवार की शाम ही तेंदुए वन टीम के सामने खेत से निकलकर पास में ही नहर की पुलिया में घुस गया था। जिस पर वन विभाग की टीम ने पुलिया के एक ओर जाल और दूसरी ओर पिंजरा लगा दिया था। इसके बाद रेस्क्यू कर टीम ने रात करीब 11:00 बजे तेंदुए को पकड़ लिया था। शनिवार को तेंदुए को डियर पार्क ले जाया गया, जहां उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया। डिप्टी वन रेंजर पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि पकड़ा गया तेंदुआ नर और करीब छह वर्ष की आयु का है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर उसे बिजनौर में साहनपुर रेंज उत्तराखंड के जंगल छोड़ दिया गया।
तेंदुए के हमले से गंभीर घायल हुए दलवीर सिंह के भाई नीशू कुमार ने बताया कि चिकित्सकों ने दलवीर की हालत गंभीर देखते हुए उसकी गर्दन का ऑपरेशन किया है। स्थिति गंभीर बनी हुई है और वह बेहोशी की हालत में है। घायल के दो बेटी और दो बेटे हैं। जिंदगी से जूझ रहे घायल दलवीर के परिजन हैं। संवाद
क्षेत्र में लगातार तेंदुए दिखाई दे रहे हैं और यह पकड़े भी जा रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी तेंदुओं का आतंक कम नहीं हो रहा है। कांठ तहसील में तेंदुओं की संख्या अधिक होने पर वन विभाग ने इसे पहले से ही तेंदुआ बाहुल्य क्षेत्र घोषित किया हुआ है। अभी दो मई को ही कांठ-अमरोहा मार्ग स्थित ब्राइटलैंड पब्लिक स्कूल शाहूपुर के रिसेप्शन कक्ष में एक तेंदुआ घुस गया था, जिसे वन विभाग की टीम ने तीन घंटे की मशक्कत के बाद रेस्क्यू कर पकड़ा था और बाद में तेंदुए को अमानगढ़ के जंगल में छोड़ा दिया गया था। इससे पहले भी कई तेंदुए जा चुके हैं और कई सड़क हादसों का शिकार हो चुके हैं। संवाद
अधिकांश तेंदुए कांठ क्षेत्र के तराई इलाकों में ज्यादा दिखाई देते हैं। कांठ में मिश्रीपुर, बेगमपुर, सलेमपुर, हीरापुर, खूंटखेड़ा, फजलाबाद, रामसराय, पाइंदापुर, भंकरी, दरियापुर, रफायतपुर, बहादरपुर खद्दर, गोपालपुर, शेरपुर, रूस्तमपुर, मुजफ्फरपुर टांडा, मघपुरी, गांवड़ी, गुलड़िया, सबदलपुर बाड़ीवाला, चेतरामपुर, मुख्त्यारपुर नवादा, अहमदपुर निंगू नंगला, खलीलपुर कद्दीम, पेली विश्नोई, सिरसा, ठाट, मिलक, पहाड़मऊ और छजलैट क्षेत्र में पोटा, निघी, मुंडाखेड़ी, सीमला, बगिया सागर, जस्सू नंगला, छजलैट, फत्तेहरपुर विश्नोई, मौढ़ा तैईया, मधुआ खालसा आदि क्षेत्रों में अक्सर तेंदुए दिखाई देते रहते हैं। संवाद