बिलारी। तहसील मुख्यालय पर संचालित हुए ग्राम न्यायालय के न्यायाधिकारी ने सड़क दुर्घटना के लगभग तीस साल बाद दो मुकदमों में आरोपियों को सजा सुनाई है।
थाना कुंदरकी के खनूपुरा गांव निवासी छत्रपाल सिंह ने 24 सिंतबर 1990 को थाना बिलारी पर इस आशय का मुकदमा दर्ज कराया था कि स्कूटर सवार उसके भाई मित्रपाल सिंह को बिलारी से चंदौसी जाते समय शाहपुर गांव के सामने रोडवेज बस चालक ने तेजी से बस चलाते हुए टक्कर मार दी थी। इस घटना में मित्रपाल सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी। थाना बिलारी पुलिस द्वारा दर्ज मुकदमे की विवेचना के दौरान रोडवेज बस चालक के रूप में बदायूं शहर के मोहल्ला सैयदबाड़ा निवासी मोहम्मद इल्यास का नाम प्रकाश में आया। बिलारी पुलिस ने मौके के साक्ष्य इकटठा करते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 279,338,304ए और 427 के तहत चार अक्टूबर 1990 को बस चालक मोहम्मद इल्यास के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। लगभग 34 साल तक अदालत में मुकदमे की सुनवाई होने के दौरान ग्राम न्यायालय बिलारी के न्यायाधिकारी अशोक कुमार ने फैसला सुनाया है।
ग्राम न्यायालय से मिली जानकारी के अनुसार अभियुक्त मोहम्मद इल्यास को धारा 279 में तीन माह की सजा और 400 रुपये अर्थदंड, धारा 338 में एक वर्ष की सजा और 500 रुपये अर्थदंड, 304ए में एक वर्ष की सजा और 500 रुपये अर्थदंड तथा 427 में छह माह की सजा और 400 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। दूसरा मुकदमा 24 नंबवर 1996 को थाना बिलारी के मोहम्मद इब्राहीमपुर गांव निवासी नजारूल हुसैन ने थाना बिलारी में दर्ज कराया। नजारूल हुसैन के अनुसार उसके पिता मुमताज हुसैन इब्राहीमपुर गांव के सामने सवारी वाहन का इंतेजार कर रहे थे तभी एक निजी यात्री बस चालक ने तेजी से टक्कर मार दी और उसके पिता मुमताज हुसैन की मौके पर मौत हो गई।
थाना बिलारी पुलिस द्वारा मुकदमे की विवेचना करने पर आरोपी बस चालक के रूप में सतीश चंद्र निवासी पावर हाउस कालोनी कस्बा चंदौसी जिला संभल का नाम प्रकाश में आया। इस मुकदमे की भी लगभग 28 साल तक अदालत में सुनवाई के बाद अब फैसला सामने आया है। ग्राम न्यायालय बिलारी के न्यायाधिकारी अशोक कुमार ने अभियुक्त सतीश चंद्र को धारा 279 में छह माह की सजा और 500 रुपये अर्थदंड और धारा 304ए में दो वर्ष की सजा और एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।