फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टीका लगने से चार माह की बच्चे की मौत की चर्चा से मची खलबली

विज्ञापन
The discussion about the death of a four-month-old child due to vaccination caused panic - फोटो : JPNAGAR
विज्ञापन
गर्भवतियों और बच्चों को विभिन्न रोगों से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से सोमवार को आयोजित टीकाकरण शिविर में शामिल रहे बच्चों में से 10 की तबीयत बिगड़ने और चार माह के एक बच्चे की मौत की जानकारी दिए जाने से मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई। एसडीएम और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर हालात जाने। बीमार बताए जा रहे 10 बच्चों का स्वास्थ्य केंद्र लाकर परीक्षण किया। अधिकांश बुखार, सर्दी के असर जैसी समस्या से पीड़ित मिले। सीएमओ ने वैक्सीन के नमूने जांच के लिए भिजवाने के साथ पूरे मामले की पड़ताल शुरू कराई है।
विज्ञापन

स्वास्थ्य विभाग की ओर से सोमवार को टीकाकरण के इस शिविर का आयोजन नौगांवा सादात के देहरा गांव में किया गया था। मंगलवार को ग्रामीणों द्वारा टीका लगवाने वाले बच्चों में से कई की तबीयत बिगड़ने और एक की मौत हो जाने की जानकारी दी गई। आनन फानन नौगांवा सादात के एसडीएम अशोक शर्मा और नगर सीएचसी प्रभारी डॉ. उमर फारूख के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव का रुख किया। वहां बताया गया कि मौत की जद में आया चार माह का बच्चा गेंदा सिंह का बेटा गुरमीत था, जिसका जन्म एक निजी अस्पताल में हुआ था। एसडीएम ने बताया कि गुरमीत के शव का पोस्टमार्टम कराने के निर्देश दिए लेकिन परिजनों ने इससे इन्कार कर दिया। पोस्टमार्टम से मौत की वजह साफ हो जाने की बात समझाने पर भी वे लोग पोस्टमार्टम कराने के लिए रजामंद नहीं हुए और अंतिम संस्कार कर दिया।
नगर सीएचसी प्रभारी डॉ. उमर फारूख ने बताया कि बीमार बताए गए 10 बच्चों की स्वास्थ्य केंद्र लाकर जांच की गई। अधिकांश में बुखार या मौसम के प्रभाव से होने वाली समस्याएं पाई गईं। जरूरी उपचार के बाद छह बच्चों को छुट्टी दे दी गई, जबकि चार को भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। घर भेजे गए छह बच्चों का बुधवार को फिर परीक्षण किया जाएगा।
विज्ञापन

डॉ. फारूख ने बताया कि चार माह के गुरमीत का जन्म निजी अस्पताल में हुआ था। जन्म के समय उसे बीसीजी का टीका नहीं लगा था। सोमवार के शिविर में उसे बीसीजी, पैंटा, एफआईपीबी, पीसीबी, रोटा वायरस और ओपीवी (छह टीके) लगाए गए थे। गांव में शून्य से पांच वर्ष तक के तक कुल 23 बच्चों को टीके लगे थे। इनमें से बच्चे की उम्र और जरूरत के हिसाब से छह टीकों में से जरूरी टीकों का प्रयोग हुआ था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें